
नई दिल्ली: सावन का महीना, मतलब बारिश और महादेव को कांवड़ में जल चढ़ाने जाते शिवभक्त. लोग इन्हें कांवड़िया कहकर पुकारते हैं, जिनके रास्ते के विघ्न स्वयं भोलेनाथ दूर करते हैं. इस दौरान कांवड़ में जल भरकर ले जाने की तपस्या के कई अलग और अनूठे रूप देखने को मिलते हैं, लेकिन सबका लक्ष्य एक ही होता है, सावन के पावन में भोलेनाथ को जल चढ़ाना. कुछ ऐसा ही ‘अजब-गजब’ दिखा जब गाजियाबाद के दो नन्हें शिवभक्त स्केटिंग करते हुए कांवड़ ले जाते हुए दिखाई दिए, जिन्हें लोगों के मुंह से बरबस ही निकल पड़ता था- ‘हर हर महदेव’. नंदिनी और युग ने हरिद्वार से गाजियाबाद की कांवड़ यात्रा स्केटिंग करते हुए पूरी की है. उन्हें कांवड़ यात्रा के दौरान स्केटिंग करता देख हर कोई अचंभित हो जाता था. हालांकि, नंदिनी और युग के साथ कांवड़ यात्रा में परिवार के लोग सहयोग के लिए मौजूद रहे. दोनों ने कांवड़ यात्रा के दौरान न सिर्फ स्केटिंग की बल्कि स्टंट भी करके दिखाए.
पांच दिन में पूरी की यात्रा: नंदिनी और युग के पिता मुखिया मोहित गुर्जर ने बताया, 17 जुलाई को हरिद्वार से कांवड़ उठाकर यात्रा की शुरुआत की गई थी. करीब 200 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा को पांच दिन में पूरा किया. नंदिनी और युग ने गाजियाबाद पहुंचकर प्राचीन दूधेश्वर नाथ मठ मंदिर में जलाभिषेक किया. पहली बार नंदिनी और युग ने स्केटिंग करते हुए कांवड़ यात्रा पूरी की है. साथ ही आने वाले समय में कई अन्य धार्मिक यात्राएं भी दोनों ने करने का प्रण लिया है. उनके साथ कांवड़ यात्रा के दौरान परिवार के 15 सदस्य मौजूद रहे.
ऐसे शुरू हुई स्केटिंग: इस स्केटिंग कांवड़ यात्रा के पीछे एक लंबी कहानी है. मुखिया मोहित गुर्जर ने कहा, बचपन से ही मुझे स्केटिंग का शौक था, लेकिन परिवार वाले चोट लगने के डर से स्केट्स नहीं दिलाया करते थे. घर के नजदीक के मंदिर में जब परिवार के शिव भक्त कांवड़िया जल लेकर आते थे तो उनके आगे मैं स्केटिंग किया करता था. आज मैं दो बच्चों का पिता हूं, लेकिन स्केट्स को लेकर जुनून अब भी बरकरार है. आज भी छुट्टी के दिन स्केटिंग करता हूं. मुझे देख बच्चों की भी स्केटिंग में रुचि हुई और उन्होंने भी स्केटिंग शुरू कर दी. स्कूल में भी स्केटिंग क्लासेस जॉइन कर स्केटिंग को बेहतर बनाया.



