Home छत्तीसगढ़ उत्साह के साथ मनाया गया हरेली गेड़ी चढ़ने का उठाया लुत्फ़

उत्साह के साथ मनाया गया हरेली गेड़ी चढ़ने का उठाया लुत्फ़

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रिपोर्टर मुन्ना पांडेय : लोक त्योहारों में हरेली त्योहार का विशेष महत्व रहा है। हिन्दू त्यौहार में प्रथम मानी गई है। लखनपुर ब्लाक क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में कहीं कहीं हरेली त्योहार 24 जुलाई दिन गुरुवार को उल्लास के साथ मनाया गया। अच्छी फसल पैदावार की कामना के साथ गांव के कृषक वर्ग इस त्योहार को दिल के गहराई से मनाते हैं। हरेली त्योहार प्रत्येक साल सावन महीने के अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। हरेली का महत्व कृषि कार्यो की पूर्णता फसलों की अच्छी पैदावार सलामती से जुडा है।जैसा कि हरेली का शाब्दिक अर्थ हरा अथवा हरित या हरियाली से है। इसे मनाने का मकसद देवताओं के प्रसन्नता, कृपा प्राप्ति बरखा के साथ उगने वाली हरियाली का आभास कराना होता है । धरती मानों दूर-दूर तक हरियाली की चुनरी ओढ़े मुस्कराते हुए समस्त जीवन को खुशियों का पैगाम दे रही है।

हरेली का आयोजन मुख्यतः गांवों में होता है। इसी प्रथा को कायम रखते हुए हरेली के मौके पर किसानों ने जंगल से लाकर अपने खेतों में बेलवा नीम का डगाल गाड़ा ,नागर ( हल) जुआ, घंटी ,फावड़ा, गैंती बसूला, टांगी, इत्यादि कृषि औजारों को एकत्रित कर पूजा अर्चना किये । पीढ़ियों से चली आ रही परमपरानुसार चावल आटें से बने चिला रोटी पकौडी, पकवान बनाकर गाय बैल को खिलाया तथा आस-पड़ोस में प्रसाद का वितरण किये।इस दिन गेड़ी चढ़ने की परिपाटी रही है इस प्रथा को भी कायम रखते हुए कही कही गांवों में यह रस्म अदा की गई। गेड़ी चढ़ने का चलन आहिस्ता आहिस्ता लुप्त होती जा रही है।

सरकारी महकमों में भी हरेली त्योहार मनाये जाने की धूम रही । दूर दराज गांवों में हरेली त्योहार मनाने का सिलसिला जारी है। ग्रामीण आपसी रायशुमारी के साथ आगे पीछे अलग-अलग तिथियों में हरेली मनाई जाती हैं।कहा जाता है हरेली के दिन गांव के बैगा गाय बैल चराने वाला चरवाहा गांव के सीमा पर तंत्र मंत्र के साथ पूजा अर्चना (निकाली) करते हैं कि गांव में कोई रोग दुःख प्रवेश न करे। सब सलामत रहे। डीह डिहारीन देवी देवताओं को जागृत कर सबकी रक्षा करने प्रार्थना करते हैं। साथ ही घर वाले अपने घरों दिवार में चारों ओर गोबर से एक लक्ष्मण रेखा बनाते हैं ताकि कोई अनिष्ट कारी शक्ति घर में प्रवेश न करें। यह भी प्रचलित है कि इस दिन टोना टोटका करने वाले अपने जादुई शक्ति को जागृत करते हैं।वैध गुनिया अपने जड़ी बूटी की पहचान तंत्र मंत्र की पूजा अर्चना करते हैं। हरेली से जुड़ी और भी मान्यता है।
चलन चाहे कुछ भी हो हरेली का अर्थ हरियाली यानी खुशी से है। जो उल्लास के साथ मनाया गया। हरेली पर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में पीने पिलाने का दौर चलता है यह परम्परा भी दिल से निभाई गई।

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