
एस एच अज़हर अमन पथ दंतेवाड़ा दिल्ली/मुंबई : आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (एएम/एनएस इंडिया) ने काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) – सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) से स्टील स्लैग वैल्यूराइजेशन तकनीक का लाइसेंस हासिल कर देश में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह भारत की पहली कंपनी है, जिसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन कार्यरत सीएसआईआर-सीआरआरआई से इस नवाचार तकनीक का लाइसेंस प्राप्त हुआ है। यह तकनीक स्टील स्लैग को वैज्ञानिक रूप से प्रोसेस कर सड़क और भवन निर्माण में उपयोगी एग्रीगेट्स में बदलने की अनुमति देती है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और पर्यावरणीय प्रभाव में कमी आएगी।

एएम/एनएस इंडिया अपने गुजरात के हजीरा स्थित प्रमुख संयंत्र में इस तकनीक का उपयोग कर “एएम/एनएस आकार” ब्रांड के तहत प्रोसेस्ड स्टील स्लैग एग्रीगेट्स का उत्पादन कर रही है। यह उत्पाद सीएसआईआर-सीआरआरआई के कड़े तकनीकी मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण दिशानिर्देशों का पालन करता है। कंपनी प्रतिवर्ष लगभग 1.7 मिलियन टन स्टील स्लैग का उत्पादन करती है, जिसे अब इस तकनीक के जरिए सड़क निर्माण के लिए उपयोग किया जा सकता है। प्रोसेस्ड स्टील स्लैग एग्रीगेट्स पारंपरिक प्राकृतिक सामग्री की तुलना में अधिक मजबूत, टिकाऊ और 30-40% अधिक लागत प्रभावी हैं। यह तकनीक सड़कों के रखरखाव और मरम्मत की लागत को भी कम करती है, जिससे यह तटीय और पहाड़ी क्षेत्रों सहित विभिन्न परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है।
सीएसआईआर-सीआरआरआई के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक सतीश पांडे ने कहा, “भारत में हर साल 19 मिलियन टन से अधिक स्टील स्लैग उत्पन्न होता है। बिना प्रोसेस किए स्लैग का उपयोग निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और स्थायित्व को प्रभावित करता है। यह लाइसेंस एएम/एनएस इंडिया को विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए स्लैग का उत्पादन और विपणन करने में सक्षम बनाता है, जो सड़क निर्माण में क्रांति ला सकता है।”
एएम/एनएस इंडिया के निदेशक और उपाध्यक्ष (सेल्स एंड मार्केटिंग) रंजन धर ने कहा, “यह लाइसेंस हमारी सर्कुलर इकॉनॉमी और ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हमने हजीरा में विश्व की संभवतः पहली ‘ऑल स्टील स्लैग रोड’ बनाई, जिसे ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ और ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में स्थान मिला। यह तकनीक भारत के नेट-जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।”
इस तकनीक के व्यापक उपयोग से भारत के स्टील स्लैग उत्पादन, जो वित्त वर्ष 2030-31 तक 60 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, का प्रभावी उपयोग हो सकेगा। स्टील मंत्रालय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सहयोग से इस तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह पहल सर्कुलर इकॉनॉमी को गति देगी, जिससे 2050 तक $2 ट्रिलियन का बाजार और 1 करोड़ नौकरियां सृजित होने की संभावना है।
तीन संभावित हेडलाइंस:
एएम/एनएस इंडिया ने स्टील स्लैग तकनीक का लाइसेंस हासिल कर खोला ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ का नया द्वार
सड़क निर्माण में क्रांति: एएम/एनएस इंडिया बनी स्टील स्लैग एग्रीगेट्स तकनीक की पहली लाइसेंसधारी कंपनी
एएम/एनएस इंडिया की सर्कुलर इकॉनॉमी पहल: स्टील स्लैग से टिकाऊ सड़क निर्माण को बढ़ावा



