
सावन माह शिव भक्तों के लिए जितना पावन है, उतना ही मां गौरी की आराधना के लिए भी महत्वपूर्ण है. इस साल सावन माह का तीसरा मंगला गौरी व्रत 29 जुलाई 2025, मंगलवार को रखा जाएगा. यह दिन विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए समर्पित है. कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रख सकती हैं. आइए जानते हैं इस पावन व्रत की पूजा विधि, महत्व और वे खास बातें जो इसे और भी फलदायी बनाती हैं.
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि:- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें. इसके बाद हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें. संकल्प में कहें कि आप यह व्रत अपने पति की लंबी आयु, सुख-शांति और अखंड सौभाग्य के लिए कर रही हैं. एक लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर मां मंगला गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. चौकी के पास एक कलश में जल भरकर रखें. कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाकर उस पर नारियल रखें. मां मंगला गौरी का ध्यान करते हुए उनका आह्वान करें.
विशेष अनुष्ठान और दान:- इस दिन मां मंगला गौरी की पूजा के साथ-साथ भगवान शिव और गणेश जी की पूजा भी करनी चाहिए. शिव परिवार की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. व्रत के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है. किसी गरीब या जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है.
मंगला गौरी व्रत का महत्व:- सावन माह में पड़ने वाले प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है. यह व्रत देवी पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप को समर्पित है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से दांपत्य जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है. जिन महिलाओं के वैवाहिक जीवन में किसी प्रकार की परेशानी चल रही है या जो संतान प्राप्ति की इच्छा रखती हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से विवाह में आ रही अड़चनें भी दूर होती हैं.



