
वैदिक पंचांग के अनुसार, मंगलवार 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या है। अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होता है। इसके लिए हर महीने अमावस्या तिथि पर पितरों का तर्पण और पिंडदान किया जाता है। वहीं, फाल्गुन अमावस्या के दिन गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान कर भक्ति भाव से भगवान शिव की पूजा की जाती है।
गरुड़ पुराण में निहित है कि फाल्गुन अमावस्या तिथि पर पितरों का तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। वहीं, व्यक्ति को पितरों का आशीर्वाद मिलता है। पितरों की कृपा से व्यक्ति विशेष के सुख- सौभाग्य और वंश में वृद्धि होती है। अगर आप भी पितरों को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो फाल्गुन अमावस्या के दिन पूजा के समय ये उपाय जरूर करें। इन उपायों को करने से व्यक्ति को पितृ दोष से राहत मिलती है।
पितृ दोष के उपाय
अगर आप मायावी ग्रह राहु और केतु की कुदृष्टि से निजात पाना चाहते हैं, तो फाल्गुन अमावस्या के दिन स्नान-ध्यान के बाद विधि विधान से भगवान शिव की पूजा करें। वहीं, पूजा के समय गंगाजल में काले तिल और सुगंध मिलाकर देवों के देव महादेव का अभिषेक करें। इस उपाय को करने से मायावी ग्रह की कुदृष्टि से मुक्ति मिलती है।
गरुड़ पुराण में निहित है कि अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करने से तीन पीढ़ी के पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। अतः फाल्गुन अमावस्या के दिन स्नान-ध्यान के बाद गंगाजल में काले तिल और जौ मिलाकर दक्षिण दिशा में मुखकर पितरों का तर्पण करें।
अगर आप पितरों की कृपा पाना चाहते हैं, तो अमावस्या के दिन स्नान-ध्यान, पूजा और तर्पण के बाद आर्थिक स्थिति अनुसार दूध, दही, चावल, गेहूं, नमक, काले तिल और कपड़े का दान जरूरतमंदों के मध्य करें ।
पीपल के पेड़ में पितरों का निवास होता है। अतः फाल्गुन अमावस्या के दिन स्नान-ध्यान करने के बाद गंगाजल या सामान्य जल में काले तिल मिलाकर पीपल के पेड़ में जल का अर्घ्य दें। इसके बाद पीपल पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाएं। इस उपाय को करने से साधक पर पितरों की कृपा बरसती है।
पितरों को प्रसन्न करने के लिए फाल्गुन अमावस्या के दिन तर्पण के समय पितृ चालीसा, कवच और स्तोत्र का पाठ करें। इसके बाद पशु-पक्षी को अन्न दें। ऐसा करने से व्यक्ति पर पितरों की असीम कृपा बरसती है।



