
अमन पथ न्यूज बालोद से उत्तम साहू : शिवपुराण मनुष्य को ही नहीं सभी जीव जंतुओं को तारता हैं, भगवान शिव के भक्तों को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए, जब हम कोई धार्मिक अनुष्ठान करते हैं तो शिव भक्त को अवश्य बुलाना चाहिए क्योंकि अगर उस कार्य में त्रुटि हो जाता है तो भक्त को देखकर भगवान शिव त्रुटि को माफ कर देते हैं।गले में सोने की चैन रहती हैं तो चोरों की नजर रहती है और गले में रुद्राक्ष की माला रहती है तो भगवान भोलेनाथ की नजर रहती हैं।उन्होंने कहा माता पिता की परिक्रमा कर लो तो 33कोटि देवी देवता की परिक्रमा हो जाती हैं ।उक्त विचार नगर के माहेश्वरी भवन में आयोजित संगीतमय शिव महापुराण के छटवें दिन मंगलवार को प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के पुत्र कथा व्यास पंडित राघव मिश्रा ने व्यक्त किए।
किसी संत के घर तक या मंदिर तक पैदल चलकर जाने से उतने कदम का अश्वमेध यज्ञ का पुण्य प्राप्त हो जाता है–
पंडित राघव मिश्रा ने कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहा शिव पुराण में तीन प्रकार के लोग कथा सुनने आते हैं पहला श्रोता जो सोते रहता है दूसरा श्रोता जो कथा में त्रुटि ढूढता है तीसरा श्रोता जिसे सिर्फ कथा से मतलब होता है।शिव भक्त के असली श्रोता को महादेव की कथा से मतलब होता हैं। उन्होंने कहा जीवन में हमेशा उत्साह होना चाहिए।उन्होंने बताया यज्ञ दो प्रकार के होते हैं पहला यज्ञ जिसमें आहुति दी जाती हैं और दूसरे यज्ञ में भूखे को भोजन कराया जाता हैं।उन्होंने कहा किसी संत के घर तक या मंदिर तक पैदल चलकर जाते हैं तो उतने कदम का अश्वमेध यज्ञ का पुण्य प्राप्त होता है। उन्होंने शिव भक्तों को पुरूषमृगा ऋषि की कथा बताते हुए कहा कि धार्मिक आयोजन में शंकर के भक्त को बुलाने से उस कार्य में कोई बाधा नहीं होता हैं।
कथा प्रसंग में उन्होंने आगे बताया कि किस प्रकार से भगवान गणेश ने माता-पिता की परिक्रमा कर प्रथम पूजनीय बने थे।कथा के अंत में भगवान गणेश का विवाह रिद्धि सिद्धि के साथ कराया गया। बरसते पानी में भी शिव भक्तों का उत्साह देखने लायक था कथा सुनने बड़ी संख्या में शिव भक्त पहुंचे और भजन का बहुत आनंद लिया।
कल कथा सुबह 8बजे से होगी
सात दिवसीय शिव महापुराण का कल विराम हो जाएगा।कथा कल सुबह 8 बजे से 11 तक होगी।



