Mumbai:- आप एक ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जो आपको आखिर तक बांधे रखे? जहां हर पल कुछ नया और रोमांचक हो? अगर हां, तो विजय देवरकोंडा की फिल्म किंगडम (हिंदी में साम्राज्य) आपके लिए ही बनी है. ये फिल्म 90 के दशक की कहानी बताती है, जहां एक भाई अपने खोए हुए भाई को ढूंढने के लिए एक खतरनाक मिशन पर जाता है. इसमें सस्पेंस, ड्रामा और भावनाओं का खूब तड़का लगाया गया है. आइए, बात करते हैं विजय देवरकोंडा के इस किंगडम में क्या खास है.
कहानी:- ये कहानी 1990 के दशक की है. श्रीलंका में कुछ तेलुगू निवासी रहते थे, जो भारत के श्रीकाकुलम से आए थे. सूरी (विजय देवरकोंडा) एक बहादुर और दबंग पुलिसवाला है, जो गलत काम करने वाले अपने बड़े अफसरों को भी नहीं छोड़ता. सूरी की इस बहादुरी की वजह से उसे श्रीलंका में एक खुफिया मिशन पर भेजा जाता है. इस मिशन के बदले उसे अपने 18 साल से लापता बड़े भाई सत्यदेव से मिलाने का वादा किया जाता है. सूरी चुपचाप जाफना जेल में घुसता है और अपने भाई सत्यदेव से मिलता है. आगे क्या होता है? ये जानने के लिए आपको थिएटर में जाकर ये फिल्म देखनी होगी.
एक्टिंग:- विजय देवरकोंडा ने किंगडम में कमाल कर दिया है. एक सीधा-सादा सिपाही हो या फिर जेल में बंद कैदी, हर रूप में वे पूरी तरह से ढल गए हैं. उनकी एक्टिंग में इतना दम है कि वे अकेले ही पूरी फिल्म को अपने कंधों पर खींच लेते हैं. खासकर, नाव वाला सीन तो उनका बेहद दमदार है. भाग्यश्री बोरसे ने भी अपनी भूमिका में अच्छा काम किया है और उनकी ऑन-स्क्रीन मौजूदगी कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करती है. विजय के साथ उनकी केमिस्ट्री भी अच्छी है. सूरी के बड़े भाई शिवा का किरदार निभाने वाले सत्यदेव ने भी उतना ही जबरदस्त काम किया है. उन्होंने अपने किरदार में ऐसी जान डाली है कि कहानी और भी गहरी हो जाती है. दोनों भाइयों के बीच के इमोशनल सीन दिल छू लेते हैं. बाकी सभी किरदार अपनी भूमिका से पूरा न्याय करते दिखे हैं.
देखें या नहीं:- अगर आप एक ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जो आपको सोचने पर मजबूर करे, जिसमें एक्टर्स की एक्टिंग दमदार हो और जो आपको एक अलग तरह का सिनेमा दिखाए, तो “किंगडम” आपके लिए बिल्कुल सही है. विजय देवरकोंडा की शानदार एक्टिंग और बढ़िया सिनेमैटिक एक्सपीरियंस के लिए आप इसे थिएटर में जरूर देख सकते हैं.



