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गणेश चतुर्थी पर क्यों किया जाता है विसर्जन, क्यों बनी है यह प्रथा?

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गणेश विसर्जन हर साल अनन्त चतुर्दशी के दिन किया जाता है यानि दस दिनों के गणेश उत्सव के बाद भगवान गणेश का विसर्जन किया जाता है. साल 2025 में गणेश चतुर्थी 27 अगस्त को है. हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि से यह पर्व शुरू होता है और इसका समापन चतुर्दशी तिथि के दिन होता है. इसी वजह से उत्सव का अंतिम दिन गणेश विसर्जन के नाम से जाना जाता है. गणेश विसर्जन के दौरान भगवान गणेश की प्रतिमा को नदी, तालाब में विसर्जित किर जाता है. विसर्जन के पहले, गणेश भगवान की पूजा व आरती की जाती है, फूल चढ़ाये जाते हैं और प्रसाद, नारियल का भोग लगाया जाता है. इसके बाद ढोल-नगाड़ों के साथ धूमधाम से गणेश प्रतिमा को नदी या तालाब तक लाया जाता है और उन्हें विदाई दी जाती है और अगले साल आने का आग्रह किया जाता है.

कैसे हुआ था भगवान गणेश जा जन्म:- भगवान गणेश का जन्म माता पार्वती के शरीर की मैल से हुआ था. जब माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं, तो उन्होंने अपने शरीर के मैल से एक पुतला बनाया और उसमें प्राण डालकर उसे अपने द्वार पर पहरा देने के लिए कहा. उस पुतले का नाम गणेश रखा गया. जब भगवान शिव वहां आए, तो गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया, जिससे देवों के देव महादेव क्रोधित हो गए और उन्होंने गणेश जी का सिर काट दिया. बाद में, पार्वती जी के दुखी होने पर, शिवजी ने एक हाथी के बच्चे का सिर गणेश जी के धड़ से जोड़कर उन्हें पुनर्जीवित किया.

माता पार्वती ने गज मुख बालक को अपने हृदय से लगा लिया. तीनों देवों ने ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने उस बालक को सर्वाध्यक्ष घोषित करके अग्रपूज्यहोने का वरदान दिया. इस दौरान गणेश जी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और घर से नकारात्मकता दूर होती है.गणेश जी का जन्म मिट्टी या शरीर की मैल या उबटन से हुआ था उनकी मूर्ति को भी मिट्टी से बनाया जाता है. गणेश जी मूर्ति का विसर्जन नदी, तलाब या पानी में उनके जन्म चक्र को दर्शाने के लिए किया जाता है.

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