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बाढ़-बारिश में धान की फसल को इस रोग का खतरा, एक्सपर्ट्स ने बताए नुकसान से बचने के उपाय

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अनियमित बारिश और बदलते मौसम के बीच धान की फसल पर एक नया खतरा मंडरा रहा है. इस समय अधिक संवेदनशील अवस्था में फसल को भूरा फुदका (ब्राउन प्लांट हॉपर) कीट से बचाने की सलाह दी जाती है. इसके लिए ICAR-पूसा ने विशेष एडवाइजरी जारी की है. आइए जानते हैं इस में क्या-क्या सुझाव दिए गए हैं.

भूरा फुदका कीट क्या है?

भूरा फुदका एक छोटा, मच्छर जैसे कीट है, जो धान के पौधों के तनों के निचले हिस्से पर बैठकर पौधे का रस चूसता है. जब यह कीट एकत्रित होकर अधिक संख्या में हो जाता है, तो पूरे खेत में “हॉपर-बर्न” की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे खेत सूखने लगता है और फसल को भारी नुकसान होता है. विशेषकर जब फसल तेजी से विकास के चरण में होती है, तब यह कीट अधिक विनाशकारी हो जाता है.

कैसे पहचानें यह कीट?

यह कीट धान के पौधों के निचले हिस्सों में छिपा रहता है और सामान्य दृष्टि से पहचानना मुश्किल होता है. इसके संकेत-पौधे का पीला पड़ना, सूखना और खेत की उपज में गिरावट हो सकते हैं.

ICAR-पूसा के सुझाव

1. बिना वजह के रासायनिक छिड़काव से बचें-बारिश की आशंका के समय रासायनिक छिड़काव से बचना चाहिए क्योंकि इससे कीटों के नियंत्रण में समस्या हो सकती है.

2. फेरोमोन ट्रैप्स लगाएं-तना छेदक जैसे कीटों की निगरानी के लिए प्रति एकड़ 3–4 फेरोमोन ट्रैप्स लगाए जाएं. इससे प्रारंभिक पहचान और नियंत्रण में मदद मिलती है.

3. कीटनाशक का सही उपयोग करें-अगर फसल में पत्ता मरोड़ या तना छेदक कीट का प्रकोप अधिक हो जाए. ‘करटाप 4% दानेदार (Cartap 4% granules)’ को 10 कि.ग्रा. प्रति एकड़ की दर से छिड़का जाए.

4. जलनिकासी की व्यवस्था करें-खेतों में जलभराव होने से यह कीट तेजी से फैलता है इसलिए सुनिश्चित करें कि खेतों से जलीय निकासी अच्छी तरह हो रही हो.

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