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रायपुर नगर निगम के पार्षद को मिली अनुकंपा नियुक्ति, जनप्रतिनिधि को सरकारी नौकरी पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर नई हलचल मच गई है. रायपुर नगर निगम के भाजपा पार्षद कैलाश बेहरा को उनकी मां की मृत्यु के बाद भृत्य (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने से विवाद खड़ा हो गया है. कांग्रेस ने इस नियुक्ति को असंवैधानिक और शर्मनाक करार दिया है. कांग्रेस ने राज्य सरकार और नगरीय प्रशासन विभाग पर नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाया है.

भाजपा पार्षद को अनुकंपा नियुक्ति, मचा सियासी बवाल: रायपुर नगर निगम के वार्ड से भाजपा पार्षद कैलाश बेहरा को नगरीय प्रशासन विभाग ने अनुकंपा नियुक्ति दी है. जानकारी के मुताबिक, उनकी मां मुन्नीबाई बेहरा, जो नगर निगम में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थीं, कुछ माह पहले निधन हो गया था. उनकी मृत्यु के बाद पार्षद बेटे को ही भृत्य पद पर नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया.

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नौकरी की लिस्ट 

सरकार ने तो नियमों की धज्जियां उड़ा दी-कांग्रेस: इस नियुक्ति का पत्र जैसे ही सार्वजनिक हुआ. कांग्रेस ने इसे लेकर राज्य सरकार और नगर निगम प्रशासन दोनों पर तीखा प्रहार किया है. पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि विष्णु देव साय की सरकार ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जो अब तक किसी ने नहीं किया है. एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को सरकारी नौकरी देना न सिर्फ नियमों के खिलाफ है, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं का भी उल्लंघन है. मुझे लगता है यह सरकार भांग खाकर चल रही है.

“भांग खाकर चल रही है सरकार”: बैज ने आगे कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि चाहे वह पार्षद, विधायक या सांसद हो, ऐसे जन प्रतिनिधि को सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकती. यह हितों के टकराव (conflict of interest) का साफ मामला है.

इस नियुक्ति को तत्काल रद्द किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए- दीपक बैज, पीसीसी चीफ

इस नियुक्ति के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है. कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को घेर रही है. अब देखना होगा कि नगर निगम पार्षद की अनुकंपा नियुक्ति का आदेश रद्द करता है, या फिर पार्षद अनुकंपा नियुक्ति पर नौकरी ज्वाइन करते हैं.

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