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भारत में रहना है तो जय श्रीराम कहना होगा, रामभद्राचार्य ने छत्‍तीसगढ़ में कहा

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पेंड्रा : भारत में रहना है तो जय श्रीराम कहना होगा, जो जय श्रीराम नहीं कहेगा वह इस देश में नहीं रहेगा। उक्त बातें संत पद्मविभूषण से अलंकृत स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के समापन दिवस पर कही। उन्होंने कथा में सुदामा चरित्र की कथा सुनाई।

उन्होंने हाईस्कूल मैदान में श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन भगवान श्रीकृष्ण एवं सुदामा चरित्र की कथा सुनाई थी। उन्होंने कहा कि वे फिर से पेंड्रा में भगवान श्रीराम कथा के लिए उपस्थित होंगे। अब वे नौ दिनों के लिए आएंगे।

उन्होंने भागवत कथा के क्रम में बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की मुख्य आठ पत्नियां थी इसमें रुक्मिणी, जाम्बवती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रबिन्दा, नग्नजिती, भद्रा और लक्ष्मणा, इन आठ पत्नियों को अष्टभार्या के नाम से जाना जाता है।

वहीं उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण जी की 16000 पत्नियां भी थीं, जो सभी नारकासुर नामक राक्षस की कैद में थीं। जब भगवान कृष्ण ने नारकासुर का वध किया, तो उन्होंने इन सभी महिलाओं को मुक्त कराया।

नारकासुर की कैद से मुक्त होने के बाद उन्हें उनके परिवारों या समाज ने स्वीकार नहीं किया, इससे उनके सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया। उनकी गरिमा और सम्मान की रक्षा के लिए, भगवान श्रीकृष्ण ने उन सभी को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया और उन्हें द्वारका में अलग-अलग महल में रखा था।

वहीं उन्होंने कहा कि परमात्मा की पत्नी का नाम भक्ति है। तो वहीं श्रीराम अवतार में सीता जी और श्रीकृष्ण अवतार में राधा जी थी। जीवात्मा की पत्नी का नाम बुद्धि है। मैंने भगवान श्रीकृष्ण की रास लीला की पुस्तकें लिखी है। उन्होंने कहा कि जो भगवान का भजन करता है। उससे गलती नहीं होती है।

भगवान का भजन करते हुए समय गलती हो जाए तो भक्त उसे सुधार लेता है और भगवान उसे क्षमा कर देते हैं। जीव को भवसागर से पार सदगुरु के चरणों में लगाने से पार होता है। वहीं उन्होंने कहा कि भारत में रहना है तो जय श्रीराम कहना है। जो जय श्रीराम नहीं कहेगा वह इस देश में नहीं रहेगा।

कथा के बाद श्रद्धालुओं ने स्वामी रामभद्राचार्य से गुरुदीक्षा ली थी। कथा के समापन के पश्चात भंडारा प्रसाद आयोजित किया गया था। इसमें भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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