
रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : लोक त्योहार के श्रृंखला में देव उठन त्योहार का विशेष महत्व रहा है। 1नवम्बर दिन शनिवार को नगर लखनपुर सहित आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में लोक त्योहार देव उठन एवं शालिग्राम तुलसी पर्व धूमधाम से मनाया गया।दरअसल यह त्योहार संसार के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। देव उठनी कार्तिक मास के शुक्लपक्ष एकादशी तिथि को मनाई जाती है इसे प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।मांगलिक कार्यों की शुभारभ देव उठनी के सा होता है। पौराणिक मान्यता अनुसार इस दिन भगवान विष्णु 4 महिने की निद्रा के बाद जागते हैं ।इसलिए इसे देव उठन कहा जाता है। हिन्दू धर्म के सभी मांगलिक कार्य जैसे शादी विवाह, मुंडन गृहप्रवेश संस्कार आदि की श्री गणेश यही से होता है ।
इस दिन तुलसी विवाहोत्सव पर्व भी मनाई जाती है। जिसमें ईख की मंडप बनाकर मां तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह व पूजन किया जाता है। इस रस्म को भी लोगों ने बखूबी निभाया।श्रद्धालुओं ने मां तुलसी शालिग्राम की पूजा कर कुटुंबियों तथा परिवार की सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना किये । पूजा सम्पन्न होने के बाद शकर कद कुम्हड़ा बतासे लाई का प्रसाद वितरित किये। इतना ही नहीं लोगों ने अपने घरों तथा मंदिरों में भगवान सत्यनारायण के कथा पूजन का आयोजन किये ।कृषक वर्ग अपने पालतू गाय बैल बछड़ों को लक्ष्मी स्वरूप मानकर विधिवत पूजन करते हुए शकरकंद कद्दू कुम्हड़ा चावल से बनी रोटी खिलाया ।
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में देव उठन के मौके पर तांत्रिक गुनिया अपने देवी देवताओं तंत्र मंत्र को तथा जानकार वैद्यों ने अपनी जडी बुटीयो को जागृत रखने के लिए पूजा अर्चना कर बकरे मुर्गे की बलि दी साथ ही कच्ची महुआ शराब अर्पित किये। चावल आटे से गाय बैल बिल्ली के पैरों के पद चिन्ह तथा हाथ पंजे का निशान घर के दिवालों पर बनाने की रस्म अदा किये। गौशाला तथा घरों को दीपमालाओं से सजाकर दीपावली की तरह देव उठन त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया देर रात तक आतिशबाजी होती रही।



