
महासमुंद : छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार की कथित किसान हितैषी नीतियाँ अब खुद किसानों और कर्मचारियों के गले की फांस बनती जा रही हैं। प्रदेशभर की सहकारी समितियों के कंप्यूटर ऑपरेटर पिछले चार दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, वहीं आज से सहकारी बैंक के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हो गए हैं। इससे न सिर्फ़ सरकारी कामकाज ठप हो गया है, बल्कि प्रदेश की पूरी धान खरीदी व्यवस्था और सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
उक्त बातें किसान कांग्रेस जिलाध्यक्ष मानिक साहू ने कही। कहा कि सरकार जहां 14 नवंबर से धान खरीदी की तैयारी का दावा कर रही है, वहीं ज़मीनी हकीकत यह है कि समितियों में एक भी कंप्यूटर नहीं चल रहा, बैंक लेनदेन ठप है, और किसान खरीदी केंद्रों में असमंजस की स्थिति में खड़े हैं। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार हर साल एक नवंबर से धान खरीदी शुरू करती थी, ताकि किसानों की फसल समय पर बिक सके और उन्हें आर्थिक राहत मिले। लेकिन भाजपा की विष्णुदेव साय सरकार ने इस बार जानबूझकर धान खरीदी की तारीख 14 नवंबर कर दी, जिससे किसानों का धान खेतों और खलिहानों में सड़ने लगा है।
किसान संगठन और कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार ने यह निर्णय सोच-समझकर लिया है ताकि कम धान खरीदा जाए और बजट बचाया जा सके। सिर्फ धान खरीदी ही नहीं, सहकारी समितियों की हड़ताल से राशन दुकानों के ताले भी नहीं खुल रहे हैं। पीडीएस व्यवस्था ठप होने से आम जनता को राशन, केरोसिन और खाद वितरण जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।



