यूपी, बिहार से लेकर भारत के कई इलाकों में आपको थाली में चावल आम तौर पर दिखाई देंगे. कई लोगों का तो बिना चावल खाए खाना पूरा नहीं होता. भारत की ही तरह पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन, जापान, साउथ कोरिया समेत कई देशों में चावल एक अहम डिश है. खाने में चावल को आम तौर पर सर्व किया जाता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा किस देश में महंगे चावल बिकते हैं.आप जब बाजार चावल लेने जाते होंगे तो आप इसके लिए लगभग 30 से लेकर 800 तक खरीदे होंगे. लेकिन, जापान एक ऐसा देश है जहां दुनिया के सबसे ज्यादा महंगे चावल उगाए जाते हैं. इनकी कीमत 6 हजार से ज्यादा है.
कितनी है कीमत:- गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, दुनिया का सबसे महंगा चावल किनमेमाई प्रीमियम है, जिसकी कीमत 2016 में लगभग 9 हजार 156 रुपये (109 डॉलर) प्रति किलोग्राम है. CNN की हाल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल, किनमेमाई प्रीमियम के बॉक्स बाजार में 6 हजार 165($73.4) प्रति डिब्बा के हिसाब से उपलब्ध हैं.
क्यों है इतना खास:- यह किस्म जापान की टॉयो राइस कॉरपोरेशन ने विकसित की है, जिसमें आधुनिक खाद्य प्रौद्योगिकी और सदियों पुरानी खेती की परंपराओं का मेल है. इसकी ऊंची कीमत ने वैज्ञानिकों और उपभोक्ताओं के बीच एक दिलचस्प सवाल खड़ा कर दिया है — आखिर इस चावल को इतना खास क्या बनाता है?
कैसे होती है खेती:- 1961 में इन चावलों की खेती शुरू हुई थी. किनमेमाई प्रीमियम की कहानी चावल की पोषण क्षमता को नए तरीके से परखने के एक प्रयोग के रूप में शुरू हुई. टॉयो राइस कॉरपोरेशन के रिसर्च्स ने इसको विकसित किया. इस चावल को विकसित करने का मकसद ऐसा चावल तैयार करना था जिसे बिना धोए पकाया जा सके. यह अपना प्राकृतिक पोषक तत्व बनाए रखे, क्योंकि आम तौर पर चावल धोने से जरूरी पोषण और सतही प्रोटीन पानी में बह जाते हैं.
किनमेमाई प्रीमियमचावल कितना फायदेमंद:- इस चावल में पोषण होता है और लाभकारी लिपिड और फाइबर सुरक्षित रहते हैं. इस तकनीक से ऐसा रिन्स-फ्री चावल तैयार हुआ, जो न सिर्फ पर्यावरण के हिसाब से टिकाऊ है (क्योंकि पानी की बर्बादी कम होती है), बल्कि पोषण के हिसाब से भी महत्व है. किनमेमाई प्रीमियम में पारंपरिक सफेद चावल की तुलना में 6 गुना ज्यादा लिपोपॉलीसैकराइड्स (LPS) होते हैं. टॉयो राइस कॉरपोरेशन के अनुसार, इस चावल में डाइटरी फाइबर, बी विटामिन और अमीनो एसिड जैसे पोषक तत्व अधिक मात्रा में रहते हैं, जो सामान्य पॉलिशिंग में अक्सर खो जाते हैं. जापान में चावल लगभग 3,000 वर्षों से खाने का अहम हिस्सा रहा है. आज पूरे देश में चावल की 300 से अधिक किस्में आमतौर पर उगाई जाती हैं.



