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नौकरी चाहिए ना मुवावजा खदान को सुई के नोक के बराबर नहीं देंगे जमीन — ग्रामीणों ने कहा सहमति बनने की अफवाह फैलाई जा रही है

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रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : एसईसीएल विश्रामपुर क्षेत्र के सरगुजा जिले के लखनपुर ब्लाक क्षेत्र के अमेरा खुली खदान की एरिया बढ़ाने का काम एसईसीएल प्रबंधन द्वारा ग्राम पंचायत परसोडी कला की ओर की जा रही है जिसे लेकर ग्रामीण तथा प्रबंधन के बीच विवाद की लकीर खींच गई है। जमीन अधिग्रहण करने प्रबंधन हर संभव प्रयास कर रही है वहीं ग्रामीणो ने अपनी जमीन देने से साफ़ इंकार कर दिया है इस मुद्दे को लेकर ग्रामीण काफी अरसे से आंदोलनरत है। सुई के नोक के बराबर अपनी जमीन को खदान के लिए नहीं देने की बात कह रहे हैं। इसको लेकर प्रशासनिक स्तर पर काफी दबाव बनाया गया लेकिन ग्रामीणों ने एक नहीं सुनी और आज पर्यंत अपने जमीन को बचाने संघर्षरत हैं। गत दिन ग्रामीण एवं संबंधित कोल प्रबंधन कंपनी की अधिकारियों के दरमियान काफी झड़प हुई । बाद इसके शनिवार को ग्राम पंचायत के निस्तारी तालाब की खुदाई संबंधित कंपनी द्वारा किया गया। जिसको लेकर ग्रामीणों ने काफी विरोध किया मगर प्रशासनिक अधिकारियों के समझाइस के बाद फकत निस्तार तालाब के गिर्द खोदे गए जगह की कोयला निकाले जाने प्रबंधन और पंचायत वासियों के बीच सहमति बनी, जिसको लेकर ग्रामीणों ने कहा कि – क्षेत्र में यह बेबुनियाद अफवाह फैलाया जा रहा है कि खदान विस्तार हेतु ग्रामीण एवं कोल प्रबंधन कंपनी के बीच सहमति बन गई है। जो सरासर ग़लत है। इस बात की भनक लगने पर ग्रामीण काफी आक्रोशित है। हालांकि ग्राम पंचायत का निस्तार तालाब को जब प्रबंधन के द्वारा जबरदस्ती खोद लिया गया है तो वहां पड़े कोयला को निकालने दे रहे हैं ।लेकिन निकट भविष्य में खदान को एक इंच जमीन नहीं देने के वचन पर अडे हुये हैं। ना हमें चाहिए नौकरी ना चाहिए मुआवजा हमें अपनी जमीन चाहिए

ग्रामीणों ने कहा कि खुली खदान अमेरा परियोजना का विस्तार ग्राम पंचायत परसोडीकला की ओर किया जा रहा है जिसका आज भी विरोध है और आगे आने वाले समय में भी इसका विरोध होता रहेगा ।ग्रामीणों ने कहा कि खदान विस्तार के लिए ग्राम पंचायत की ओर एक इंच जमीन नहीं देंगे ना हमें नौकरी चाहिए ना ही हमें मुआवजा हमें अपना जमीन ही चाहिए । ग्रामवासियों ने कहा कि अपनी जमीन बचाने के लिए हमें किसी भी हद से गुजरना पड़े गुजर जायेंगे। लड़ाई होती है तो लड़ने के लिए भी तैयार हैं‌।
जब ग्रामीण और कोल प्रबंधन कंपनी तथा प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बात नहीं बनी तो उस दौरान ग्रामीणों ने प्रबंधन के अधिकारियों को एक आवेदन सौंपा गया है जिसमें ग्रामीणों ने उल्लेख करते हुये प्रबंधन को आगाह किया है कि गांव के जमीन तथा उसमें लगे फसल को किसी भी तरह की नुकसान नहीं पहुंचाया जाये।

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