काल भैरव जयंती का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, जो कि मार्गशीर्ष यानी अगहन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. यह दिन बाबा काल भैरव को समर्पित होता है और इस दिन इनकी विशेष रूप से आराधना की जाती है. इस साल काल भैरव जयंती 12 नवंबर को मनाई जाएगी. बहुत से लोग काल भैरव की पूजा तो करते हैं, लेकिन उन्हें ये नहीं पता होता कि काल भैरव किसका रूप हैं और उनकी पूजा करने से क्या फल मिलता है.
बाबा काल भैरव कौन हैं:- काल भैरव बाबा भगवान शिव के सबसे उग्र और शक्तिशाली रूप हैं, जिन्हें रक्षक और संरक्षक माना गया है. काल भैरव को “समय के स्वामी” के रूप में भी जाना जाता है और वे नकारात्मक शक्तियों व बुरी आत्माओं का नाश करते हैं. बाबा काल भैरव को तंत्र-मंत्र का देवता और काशी का कोतवाल भी माना गया है. पौराणिक मान्यता है कि ब्रह्मा जी के पांचवें सिर को काटकर उन्हें ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव ने उन्हें काशी का कोतवाल बनाया था.
भैरव बाबा की पूजा करने से क्या होता है?
भय और अवसाद का नाश:- धार्मिक मान्यता है कि भैरव बाबा की पूजा से भय और अवसाद दूर होता है.
नकारात्मक ऊर्जा से बचाव:- काल भैरव बाबा की पूजा नकारात्मक ऊर्जा, काले जादू और बुरी शक्तियों के प्रभाव से रक्षा करती है.
शत्रुओं से रक्षा:- माना जाता है कि काल भैरव की पूजा करने से ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है.
ग्रह बाधाओं से मुक्ति:- काल भैरव की पूजा से शनि और राहु जैसे ग्रहों की बाधाओं से मुक्ति मिलती है.
मुकदमेबाजी में सफलता:- धार्मिक मान्यता है कि काल भैरव बाबा की पूजा से कानूनी मामलों में सफलता मिलती है.
बीमारियों से राहत:- काल भैरव पूजा बड़ी बीमारियों और कष्टों से राहत दिलाने में सहायक मानी जाती है.



