अगले साल तंबाकू और पान मसाला और महंगा हो सकता है. मीडिया रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सरकार आगामी केंद्रीय बजट में तंबाकू और पान मसाला पर एक नए राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क (एनसीसीडी) या केंद्रीय सेस की घोषणा कर सकती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन उत्पादों पर ओवरऑल इनडायरेक्ट टैक्स के बोझ में कोई बदलाव ना हो. प्रस्तावित शुल्क को मौजूदा सेस या एनसीसीडी प्रावधानों की तरह, जीएसटी ढांचे के बाहर लागू किया जाएगा. उन्होंने बताया कि इसका मतलब है कि इसे जीएसटी काउंसिल की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन इसे वित्त विधेयक 2026 में एक संशोधन के रूप में शामिल किए जाने की संभावना है, जिससे संसद इसे सीधे पारित कर सकेगी.
तंबाकू पर नया टैक्स लगाने की तैयारी:- मनी कंट्रोल ने एक सीनियर सरकारी सूत्र के हवाले से कहा कि चूंकि यह जीएसटी शुल्क नहीं है, इसलिए काउंसिल की मंजूरी आवश्यक नहीं होगी. नए केंद्रीय शुल्क को संसद द्वारा अनुमोदित किया जाएगा और आगामी वित्त विधेयक में संशोधन के माध्यम से इसे पेश किए जाने की उम्मीद है. यह कदम सरकार द्वारा जीएसटी 2.0 ढांचे के तहत जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने के बाद उठाया गया है, जिसमें विलासिता और अहितकर वस्तुओं को एक समान 40 प्रतिशत कर स्लैब में रखा गया है. चूंकि इससे तंबाकू और पान मसाला जैसी हाई गेन वाले सिन प्रोडक्ट्स पर कुल टैक्स भार कम हो जाएगा, इसलिए केंद्र वर्तमान प्रभावी टैक्स दर को बनाए रखने के लिए एक अलग केंद्रीय शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है.
क्यों लिया जा रहा है ये फैसला:- अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया रिपोर्ट में कहा कि केंद्र का स्पष्ट मत है कि तंबाकू और पान मसाला जैसे सिन प्रोडक्ट्स पर टैक्स भार कम नहीं किया जाएगा. जीएसटी की अधिकतम सीमा 40 फीसदी होगी, लेकिन शेष राशि एनसीसीडी जैसे एक अलग केंद्रीय शुल्क सुनिश्चित करने के लिए एक नए सेस के माध्यम से बनाए रखी जाएगी. वर्तमान में, तंबाकू प्रोडक्ट्स पर कुल इनडायरेक्ट टैक्स का भार लगभग 53 फीसदी है, जबकि पान मसाला पर यह 88 फीसदी तक है – जिसमें 28 फीसदी जीएसटी और क्षतिपूर्ति सेस की अलग-अलग दरें शामिल हैं. नए जीएसटी रिफॉर्म के तहत, जीएसटी लोन का रीपेमेंट होने के बाद यह 40 फीसदी तक गिर जाएगा. अधिकारी ने कहा कि आगामी बजट में इस अंतर को पाटने के लिए एक उपयुक्त केंद्रीय तंत्र की घोषणा होने की उम्मीद है. ये या तो एनसीसीडी संशोधन के माध्यम से या एक नए सेस के माध्यम से होगा.
इसका जीएसटी 2.0 से क्या संबंध है:- जीएसटी 2.0 रिफॉर्म के तहत, सिन और लग्जरी प्रोडक्ट्स के लिए टॉप स्लैब को संशोधित कर 40 प्रतिशत कर दिया गया है. जिसमें कोई दूसरा सेस सरचार्ज शामिल नहीं होगा. इससे तंबाकू जैसे कमाई कराने वाले प्रोडक्ट्स पर प्रभावी टैक्स का बोझ कम हो गयार है. इसलिए प्रस्तावित एनसीसीडी या सेस, रेवेन्यू को बनाए रखने और ओवरऑल टैक्स भार में कोई बदलाव ना हो ऐसी व्यवस्था करने के लिए कम की गई जीएसटी दर की भरपाई करेगा.



