Home छत्तीसगढ़ राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद की चार दिवसीय कार्यशाला संपन्न

राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद की चार दिवसीय कार्यशाला संपन्न

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सुरेश मिनोचा एमसीबी : राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद (SCERT रायपुर) की टीम द्वारा जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) में चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला 07 नवम्बर से 10 नवम्बर 2025 तक जिला मुख्यालय में संचालित की गई, जिसका उद्देश्य विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधार, शिक्षकों की पेशेवर दक्षता वृद्धि तथा शैक्षणिक नवाचारों के प्रसार को बढ़ावा देना है।

उद्घाटन सत्र
कार्यशाला का उद्घाटन अपर कलेक्टर श्रीमती नर्मता डोंगरे एवं जिला शिक्षा अधिकारी आर.पी. मिरे द्वारा सरस्वती माता के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलित कर किया गया।
इस अवसर पर डॉ. विनोद पांडेय, एपीसी सूर्याेदय सिंह तथा जिला नोडल अधिकारी श्रीमती खुशबू दास उपस्थित रहे एवं कार्यशाला के संचालन में उनका सराहनीय योगदान रहा।

विद्यालयों का शैक्षणिक मूल्यांकन एवं समीक्षा
कार्यशाला के दूसरे दिन (08 नवम्बर 2025) राज्य स्तरीय मेंटर्स एवं जिला PLC ( Professional Learning Community) शिक्षकों को चार समूहों में विभाजित कर विभिन्न विद्यालयों का दौरा कराया गया।

टीमों ने निम्न बिंदुओं पर विद्यालयों का विस्तृत मूल्यांकन किया –
शिक्षण-पद्धति एवं छात्र अधिगम स्तर
शिक्षण सामग्री का उपयोग एवं शिक्षण वातावरण
विद्यालय अनुशासन एवं सामुदायिक भागीदारी
नवीन शिक्षण पहलें एवं व्यावहारिक नवाचार
राज्य के मेंटर्स के मार्गदर्शन में विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था की धरातलीय स्थिति का आकलन किया गया। इस दौरान उत्कृष्ट शिक्षण उदाहरणों को साझा किया गया तथा शिक्षण में आने वाली चुनौतियों के समाधान हेतु रणनीतियाँ तैयार की गईं।

शिक्षकों को मिली नई दिशा
समीक्षा सत्र प्रेरक एवं संवादात्मक रहा, जिसमें शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, छात्र-केंद्रित पद्धति अपनाने, बच्चों की सीखने की गति पर विशेष ध्यान देने तथा विद्यालय स्तर पर नवाचार लागू करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यशाला में SCERT रायपुर की टीम, PLC शिक्षक गण एवं विभिन्न विद्यालयों के प्रधान पाठक शामिल हुए।

गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
चार दिवसीय यह कार्यशाला जिले में शिक्षण की गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सार्थक पहल साबित हो रही है। इससे शिक्षकों में नवाचार, आत्म मूल्यांकन एवं शिक्षण-पद्धति सुधार की भावना को बल मिलेगा तथा बच्चों के अधिगम स्तर में उल्लेखनीय सुधार की संभावना है। जिला स्तर पर इस प्रकार की कार्यशालाएं राज्य की शिक्षा नीति को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

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