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3000 जवान, 10 जेट, 5 वॉरशिप.होर्मुज में जहाज पर हमले के बीच भारत का बड़ा कदम, अमेरिका से चीन तक मचा हड़कंप

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भारत और रूस की दोस्ती लंबे समय से मजबूत रही है और कई वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद दोनों देशों के रिश्ते स्थिर बने रहे हैं। अब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक सुरक्षा चिंताओं के बीच दोनों देशों ने एक बड़ा और अहम कदम उठाया है।

भारत और रूस इस बात पर सहमत हुए हैं कि वे एक-दूसरे की जमीन पर अपने सैनिक और सैन्य संसाधन तैनात कर सकेंगे।

इस समझौते के तहत दोनों देश अधिकतम 3,000 सैनिक, 10 सैन्य विमान और 5 युद्धपोत एक-दूसरे के क्षेत्र में तैनात कर सकते हैं। यह व्यवस्था भारत-रूस पारस्परिक रसद आदान-प्रदान समझौता(RELOS) के तहत लागू हुई है, जिस पर फरवरी 2025 में हस्ताक्षर हुए थे और यह 12 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गया। रूस ने भी दिसंबर 2025 में इस समझौते को औपचारिक मंजूरी दे दी थी।

पांच साल के लिए होगी तैनाती

रूसी संसद की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति के उपाध्यक्ष व्याचेस्लाव निकोनोव ने इस प्रावधान की पुष्टि की है। समझौते के अनुसार, यह तैनाती पांच साल की अवधि के लिए होगी, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है।

इस समझौते से दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। खासकर भारत के लिए, जिसके पास बड़ी संख्या में रूसी सैन्य उपकरण हैं, उनकी सर्विसिंग और रखरखाव में यह समझौता काफी मददगार साबित होगा।

इसके अलावा समझौते के तहत:

  • युद्धपोतों को बंदरगाह सेवाएं, मरम्मत, पानी और भोजन जैसी सुविधाएं मिलेंगी
  • सैन्य विमानों को एयर ट्रैफिक कंट्रोल, नेविगेशन और पार्किंग जैसी सेवाएं दी जाएंगी
  • ईंधन और तकनीकी सेवाएं भुगतान के आधार पर उपलब्ध होंगी

सामरिक साझेदारी को मिलेगा बढ़ावा

इस समझौते के जरिए दोनों देशों को एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों जैसे एयरबेस और बंदरगाह तक पहुंच भी मिलेगी। इससे भारत को रूस के रणनीतिक रूप से अहम आर्कटिक क्षेत्र तक पहुंच मिल सकती है, वहीं रूस को भारत के सैन्य ढांचे का उपयोग करने का अवसर मिलेगा।

यह समझौता केवल सैन्य तैनाती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण और आपदा राहत अभियानों को भी शामिल किया गया है। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर सहयोग कम होता दिख रहा है, भारत और रूस के बीच यह कदम दोनों देशों के मजबूत भरोसे और गहरी रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है।

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