वैदिक पंचांग के अनुसार, सोमवार 01 दिसंबर को गीता जयंती है। यह पर्व हर साल मोक्षदा एकादशी के दिन मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर जगत के पालनहार भगवान कृष्ण की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त एकादशी का व्रत रखा जाता है। वहीं, मंदिरों में गीता पाठ का आयोजन किया जाता है।
वैष्णव समाज के लिए मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि बेहद खास होता है। इस दिन वैष्णव समाज के अनुयायी अपने आराध्य भगवान कृष्ण की भक्ति भाव से पूजा करते हैं।
ज्योतिषियों की मानें तो मोक्षदा एकादशी पर ग्रह-नक्षत्रों का शुभ संयोग बन रहे हैं। इन योग में जग के नाथ भगवान मधुसूदन की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है। आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-
मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर शिववास योग समेत कई दुर्लभ और मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। शिववास योग प्रदोष काल में है। इस समय देवों के देव महादेव भगवान शिव कैलाश पर विराजमान रहेंगे। वहीं, अभिजीत मुहूर्त दिन में 11बजकर 52 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक है। इसके साथ ही रेवती और अश्विनी नक्षत्र का संयोग है।
गीता जयंती के दिन गुरु कर्क राशि में विराजमान रहेंगे। इसके साथ ही सूर्य और मंगल धनु राशि में उपस्थित हैं। इसके अलावा, बुध तुला राशि में विराजमान हैं। मन के कारक चंद्र देव मेष राशि में गोचर करेंगे। ज्योतिषियों की मानें तो ग्रहों का शुभ संयोग गीता जयंती पर बन रहे हैं। इन योग में भगवान कृष्ण की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी।
- सूर्योदय – सुबह 07 बजे
- सूर्यास्त – शाम 05 बजकर 26 मिनट पर
- ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 11 मिनट से 06 बजकर 05 मिनट तक
- विजय मुहूर्त – दोपहर 01 बजकर 57 मिनट से 02 बजकर 39 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 23 मिनट से 05 बजकर 50 मिनट तक
- निशिता मुहूर्त – रात 11 बजकर 46 मिनट से 12 बजकर 40 मिनट तक



