मुन्ना पांडेय सरगुजा :जिले को कुपोषण मुक्त बनाने जहाँ शासन बेसिक तौर पर बेहिसाब खर्च कर महिला बच्चों के लिए कई सारी योजनाएं संचालित कर रही है। लेकिन योजनाओं का लाभ जरूरतमंद महिला बच्चों को नहीं मिल रहा है। सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड में एक ऐसा गांव है जहाँ निवासरत राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवा जनजाति परिवारों के गर्भवती महिलाओं तथा शीशुवती माताओं एवं नौनिहालों को एकीकृत महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्र से पोषण आहार नहीं मिलने कारण बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं।
यहाँ आंगनबाड़ी केंद्र का हाल कुछ ऐसा है कि फकत कागजों में ही संचालित है। तथा पोषण आहार भी कागजों में ही बांटकर लोगो को कुपोषण से मुक्त किए जाने के दावे किये जा रहे। परियोजना कार्यालय में बैठे अधिकारी कर्मचारी के मेहरबानी से आ0बा0 केंद्र भगवान भरोसे चल रहा है। ये नजारा लखनपुर विकासखंड के ग्राम रेम्हला राईभवना आंगनवाड़ी केंद्र का है। इस आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यकर्ता पूजा यादव तथा सहायिका अनुराधा लकड़ा पदस्थ हैं।
इस आंगनबाड़ी केंद्र में पहाड़ी कोरवा विशेष आरक्षित जनजाति समुदाय के बच्चों की दर्ज संख्या तकरीबन 20 के आसपास है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूजा यादव के अपने मायके में निवास करने तथा सहायिका अनुराधा लकड़ा को परियोजना अधिकारी द्वारा मौखिक रूप से ग्राम भूरकुड़वा आंगनवाड़ी केंद्र में अटैच किए जाने के वजह से राईभवना का यह आँगनबाड़ी हफ्तों तक नहीं खुल पाता है। आंगनबाड़ी केंद्र के नियमित नहीं खुलने से बसाहट के विशेष जनजाति परिवार के गर्भवती महिलाओं तथा शीशु वती माताओं को बच्चों को मीनू के मुताबिक गर्म भोजन,रेडी-टू-ईट पोषण आहार समय पर नहीं मिल पाता जिससे यहाँ के बच्चे कुपोषण के शिकार हो रहे हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार ने विशेष आरक्षण प्राप्त इन विशेष जनजातियों के पोषण के लिए कई सारी योजनाएं संचालित की हैं। वावजूद इसके अधिकारियों तथा स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की लापरवाही व उदासीनता के वजह से सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरत मंद आरक्षण प्राप्त पहाड़ के गोद में बसे विशेष कोरवा जनजाति परिवारो को नही मिल पा रहा है। इतना ही नहीं आंगन केंद्रो में बीजली,पानी, भवन जैसे आधार
भूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है। क्षेत्र के लोगों को नये परियोजना अधिकारी से व्यवस्था सुधार की उम्मीद थी लेकिन कोई सार्थक नतीजा सामने नहीं आया आंगनबाड़ी केंद्रों की दशा अवस्था पूर्ववत यथावत जस का तस बनी हुई है। फिलहाल देखने वाली बात होगी की राईभवना बस्ती में निवास करने वाले विशेष आरक्षित पहाड़ी कोरवा जनजाति के लोगो को आंगनवाड़ी केन्द्रों से गर्म भोजन , रेडी -टू-इट पोषण आहार मिल पाएगा या फिर शासन के कुपोषित नियमों का शिकार हो कर रह जायेगा। शासन द्वारा कुपोषण दूर करने के सारे दावे कागज़ी व मिथ्या साबित होने लगा है।
गंभीर कुपोषित तीन बच्चे राईभवना स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में पहाड़ी कोरवा जनजाति के 06 माह से 03 वर्ष तक के दो गंभीर कुपोषित एवं 03 वर्ष से 06 वर्ष तक 01 गंभीर श्रेणी के कुपोषित बच्चे का नाम पजी में दर्ज है।
बयान– सुपरवाईजर अनीता क्रस
इस संबंध में जब सुपरवाईजर अनीता क्रस से फ़ोन के जरिए से बात की गई तो
उनके द्वारा कहा गया की मैं अंबिकापुर अपने काम से आई हूँ, और मैं बाहर जा रही हूँ।आंगनवाड़ी केंद्र के नियमित नहीं खुलने के सवाल पर उन्होंने कुछ भी कहने से साफ़ मना कर दिया।
सोमवार को बाहर से आकर बात करती हूँ ।
आंगनबाड़ी केंद्र सहायिका अनुराधा लकड़ा–
इस संबंध में राईभवना आंगनबाड़ी केंद्र सहायिका अनुराधा लकड़ा ने बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूजा यादव अक्सर अपने मायके ग्राम बकमेर से आना जाना करती है । 2 दिन पूर्व आंगनबाड़ी केंद्र मेरे द्वारा खोला गया था। परियोजना अधिकारी ने मुझे गांव भूरकुड़वा आंगनबाड़ी केंद्र में अटैच कर दिया है। सहायिका ने स्वीकार किया कि हम लोगो के लापरवाही के वजह से विशेष आरक्षित जनजाति के लोगो को पूरक पोषण आहार नहीं मिल पा रहा है।
परियोजना अधिकारी असीम शुक्ला
इस संबंध में जब महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी असीम शुक्ला से बात की गई तो उन्होंने कहा कि –मैं बयान देने के लिए अधिकृत नहीं हूँ इसलिए मैं कुछ नही कह सकता ।मैं पूरे मामला को दिखवाता हूँ।



