हिंदू पंचांग का 10वां महीना पौष मास होता है. इस माह में हेमंत ऋतु प्रभावित होती है. इस माह में ठंड काफी बढ़ जाती है. इस माह में सूर्य का विशेष प्रभाव रहता है. आज से पौष मास की शुरुआत हो चुकी है. इस माह का समापन अगले साल 2026 में तीन जनवरी को हो जाएगा. इस माह में भगवान सूर्य की विशेष पूजा-उपासना की जाती है. इस माह में भगवान सूर्य का पूजन बहुत फलदायी माना जाता है.
मान्यता है कि पौष मास में भगवान सूर्य के 11 हजार रश्मियों के साथ ऊर्जा-स्वास्थ्य का वरदान प्राप्त होता है. पौष मास में भगवान सूर्य की नियमित उपासना करने से साल भर व्यक्ति सेहतमंद और संपन्न रहता है. वहीं ज्योतिषियों के अनुसार, पौस मास के शुरू होते ही विवाह और अन्य मांगलिक काम रोक दिए जाते हैं, लेकिन इसके पीछे की वजह क्या है? आइए इसके बारे में जानते हैं.
पौष मास में क्यों नहीं होते शुभ काम:- हिंदू पंचांग में पौष का महीना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन ये महीना विवाह और अन्य मांगलिक कामों के लिए अनुकूल नहीं रहता. दरअसल, इस माह में भगवान सूर्य का प्रवेश धनु राशि में होता है. भगवान सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने के बाद खरमास लग जाता है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में भगवान सूर्य का प्रभाव कम हो जाता है. साथ ही देवताओं की गतिविधियां स्थिर हो जाती हैं. यही वजह है कि पौष माह में विवाह और अन्य मांगलिक काम करना शुभ नहीं माना जाता.
पौष मास में ये काम होते हैंं शुभ:- पौष का महीना धार्मिक साधना और आध्यात्मिक शुद्धि का समय होता है. पौष माह में नियमित रूप से भगवान सूर्य का पूजन, हवन और मंत्र जप करना चाहिए. इन कामों से शुभ फल प्राप्त होते हैं. इस माह में किसी तीर्थ स्थान की यात्रा करनी चाहिए. पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए. पौस मास में दान-पुण्य अवश्य करना चाहिए. इससे सभी पाप नष्ट हो जाते हैं.



