
नई दिल्ली : संसद में वंदे मातरम् पर बहस का आज दूसरा दिन है। बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में इस चर्चा की शुरुआत की थी, जिसके बाद से देश में सियासी घमासान छिड़ गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी वंदे मातरम् पर भाषण दिया था। वहीं, आज गृह मंत्री अमित शाह ने भी राज्यसभा में वंदे मातरम् को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा है।
गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा, “वन्दे मातरम् पर चर्चा की ज़रूरत वन्दे मातरम् जब बनी तब भी थी, आज़ादी के आंदोलन में भी थी, आज भी है और 2047 में जब महान भारत बनेगा तब भी रहेगी।”
केंद्रीय मंत्री ने संसद में क्या कहा?केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, “वन्दे मातरम् की पृष्ठभूमि में सदियों तक इस्लामिक आक्रमण झेलकर इस देश की संस्कृति को क्षीण करने और अंग्रेजों द्वारा एक नई सभ्यता और संस्कृति थोपने का प्रयास का प्रतिकार था, जिसके बाद बंकिम बाबू ने इसकी रचना की।”
अमित शाह ने आगे कहा, “मातृभूमि का वंदन प्रभु श्रीराम ने भी किया, आचार्य शंकर ने भी किया और चाणक्य ने भी किया। मातृभूमि से बड़ा कुछ हो नहीं सकता। इसी चिरंतन भाव को बंकिम बाबू ने पुनर्जीवित किया।”
अमित शाह ने आगे कहा-
वन्दे मातरम् के जब 100 साल हुए, तब वन्दे मातरम् बोलने वालों को इंदिरा जी ने जेल में डाल दिया। आपातकाल लगाया गया। विपक्ष के लोगों को, सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में भर दिया गया। अखबारों पर ताले लगा दिए गए। पूरे देश को बंदी बनाकर रख दिया गया।
संसद में कांग्रेस को घेराविपक्ष पर कटाक्ष करते हुए गृह मंत्री ने कहा, “कांग्रेस के नेतृत्व में इस सदन में वन्दे मातरम् के गान को बंद कर दिया गया था। 1992 में भाजपा सांसद श्री राम नाईक ने वन्दे मातरम् को फिर से गाने की शुरुआत करने का विषय उठाया। उस समय नेता प्रतिपक्ष श्री लालकृष्ण आडवाणी जी ने लोकसभा के स्पीकर से कहा कि इसका गान सदन में होना चाहिए।”



