
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में अयोध्या में तोड़ी गई बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बन रही एक नई बाबरी मस्जिद लगातार खबरों में बनी हुई है. TMC से निकाले गए विधायक हुमायूं कबीर ने सोमवार को फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट कर दिखाया था कि कैसे उनकी मस्जिद को बड़ी तादाद में चंदा आया है. अब मंगलवार को विधायक के सहयोगियों ने दावा किया कि मस्जिद के लिए मिले चंदे की राशि लगभग तीन करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. कबीर ने 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद जिले के रेजीनगर में इस मस्जिद का शिलान्यास किया था और महज तीन दिन में इस मस्जिद को 3 करोड़ का चंदा आ गया है. शिलान्यास के बाद से गी कबीर पर सांप्रदायिक तनाव फैलाने, साथ ही बाबरी पर राजनीति करने जैसे आरोप लग रहे हैं. लेकिन विधायक ने दावा किया है कि कुछ को छोड़कर उनके साथ पूरे भारत के मुसलमान हैं.
बाबर से मुझे प्यार ने- विधायक कबीर:- हुमायूं कबीर ने साफ कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप नहीं करती, बाबरी मस्जिद का नाम किसी भी कीमत पर नहीं बदला जाएगा. उन्होंने कहा कि बाबर से उन्हें प्यार नहीं है, लेकिन उसके द्वारा बनाई गई ऐतिहासिक इमारत को बिना वजह गिराया गया, जिससे भारत के करोड़ों मुसलमानों की भावनाएं आहत हुईं और वे उन भावनाओं को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में निर्णायक कारक होगी, क्योंकि चुनाव में किसी को साफ बहुमत नहीं आएगा. वहीं चंदें को लेकर हुमायूं कबीर ने बताया कि अब तक 77 लाख 75 हजार रुपये नकद गिने गए हैं और 2 करोड़ रुपये से अधिक ऑनलाइन फंड प्राप्त हुए हैं.
ये मस्जिद सिर्फ चंदे से बनेगी:- अपने ऊपर बीजेपी से मिले होने के आरोपों को नकारते हुए हुमायूं कबीर ने कहा है कि मुझे कहीं से पैसा नहीं मिल रहा है, ये पूरी मस्जिद चंदे से बनेगी. साथ ही उन्होंने कहा कि मस्जिद के साथ यहां हॉस्पिटल और मेडिकल भी बनेगा.
बाबरी मस्जिद से 825 किलोमीटर दूर बाबरी मस्जिद पर विवाद:- 825 किलोमीटर दूर बाबरी बनाने का चंदा कर रहा है और बेगैरत लोग ख़ामोश हैं। सत्ता का एक ऐजेंट बेहद शातिर तरीके से मूल विवाद को दूसरे राज्य में उठा ले गया और वहां मस्जिद थी. वहीं कई मुस्लिम पक्ष के लोगों ने भी हुमायूं कबीर के इस मस्जिद पर सवाल खड़े किए हैं.1993 में तोड़ी गई बाबरी मस्जिद की जगह अब राम मंदिर बन चुका है, लेकिन असल बाबरी से 825 किलोमीटर दूर बाबरी के लिए चंदा करना कितना सही है. साथ ही कई लोगों ने ये भी आरोप लगाया है कि बेहद ही शातिर तरीके से बाबरी मूल विवाद को उस राज्य ले जाया गया है, जहां जल्द चुनाव होने हैं.



