यह कहानी उस बेटी की है, जिसके भरोसे को उसके अपने पिता ने ही रौंद दिया. महज 16 साल की उम्र में उसने वह दर्द सहा, जिसकी कल्पना भी किसी के लिए मुश्किल है. शराब के नशे में धुत हैवान पिता ने उसकी अस्मत लूट ली, लेकिन पीड़िता ने हार नहीं मानी. परिवार और यहां तक कि मां का साथ न मिलने के बावजूद उसने तीन साल तक अकेले कानूनी लड़ाई लड़ी. आखिरकार उसे न्याय मिला. बेंगलुरु की विशेष अदालत ने दोषी पिता को 20 साल के कारावास की सजा सुनाई है.आरोपी मूल रूप से बिहार का रहने वाला एक मजदूर है, जो अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ उत्तरी बेंगलुरु में रहता था. पीड़ित लड़की उसकी सबसे बड़ी बेटी है, जिसने 9वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी. पिता उस पर लगातार शादी करने का दबाव बना रहा था, जिससे परेशान होकर वह उत्तर प्रदेश में अपने रिश्तेदारों के घर रहने चली गई थी.
शराब के नशे में किया रेप:- 27 जून 2023 की रात को आरोपी शराब के नशे में धुत होकर घर आया. उसने शक जताया कि जब उसकी बेटी उत्तर प्रदेश में थी, तब उसका किसी के साथ प्रेम प्रसंग था. इस बात की “जांच” करने के बहाने उसने अपनी ही बेटी के साथ रेप किया. इस वारदात के बाद, रात में जब आरोपी खाना लेने के बहाने घर से बाहर निकला, तो पीड़िता किसी तरह वहां से भाग निकली. उसने पूरी रात पास के एक पार्क में छिपकर काटी. अगली सुबह, उसने सड़क पर एक ऑटो रिक्शा चालक को देखा और उससे मदद मांगी. उसने ऑटो चालक से उसे नजदीकी पुलिस स्टेशन ले जाने की गुहार लगाई, जहां पहुंचकर उसने पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई.
मां ने भी नहीं दिया साथ:- शिकायत मिलते ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और बच्ची को सुरक्षा के लिए सरकारी महिला आश्रय गृह भेज दिया. चौंकाने वाली बात यह है कि जब पुलिस ने पीड़िता की मां को बेंगलुरु बुलाया, तो उसने अपनी बेटी का साथ देने के बजाय, पिता के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए बेटी को ही फटकार लगाई. पूरे मामले के दौरान मां और परिवार ने पीड़िता का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया था.



