
कोहरा कहर ढा रहा है. एक्सप्रेसवे पर हादसों के बाद अब इसका असर विमानों पर दिख रहा है. कोहरे के कारण फ्लाइट कैंसिल की जा रही हैं. कोहरा कितना प्रभावित कर रहा यह दिल्ली के IGI एयरपोर्ट के आंकड़ों से समझा जा सकता है. द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ सोमवार को यहां 228 फ्लाइट कैंसिल हुईं और 800 से ज्यादा डिले हुईं. मंगलवार और बुधवार को भी ऐसी ही स्थिति बनीं.
कोहरे को देखते हुए इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस ने ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है. एयरलाइंस ने यात्रियों को सलाह दी है कि खराब मौसम की स्थिति के कारण अपनी उड़ान की स्थिति की जांच लें, क्योंकि दिल्ली, अन्य उत्तरी और पूर्वी हवाई अड्डों जैसे प्रमुख एयरपोर्ट्स पर इसका असर पड़ रहा है. भारतीय विमानन प्राधिकरण ने भी घने कोहरे के कारण उड़ानों में व्यवधान की चेतावनी जारी की है. इस बीच कई फ्लाइट देरी से रवाना हुईं और कई कैंसिल की गईं.अब सवाल उठता है कि आखिर कितना कोहरा और विजिबिलिटी होने पर फ्लाइट कैंसिल कर दी जाती है?
कैसे तय होती है टेकऑफ-लैंडिंग:- एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मुताबिक, विमान की लैंडिंग और उड़ान भरने के लिए खास तरह के नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है. इसे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) कहते हैं. तेज बारिश हो या कोहरा, यह हर स्थिति में विमान की सुरक्षित लैंडिंग में मदद करता है. आसान भाषा में समझें तो यह विमान के पायलट के लिए सुपरहीरो की तरह काम करता है, जो पायलट को मौसम के हालात बताता है ताकि वो तय कर सके कि लैंडिंग या टेकऑफ करना है या नहीं.
टेकऑफ से ज्यादा लैंडिंग क्यों है रिस्की:- बोइंग की रिसर्च कहती है, आमतौर पर विमान यात्रा के कुल समय में से 4 फीसदी समय लैंडिंग में लगता है. 49 फीसदी विमान हादसे इसी लैंडिंग के दौरान होते हैं. कोहरे के कारण विजिबिलिटी कम होने से इसका खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है. हालांकि ILS सिस्टम संकेत देता है जिसके आधार फैसला लिया जाता है.



