किरंदुल : किरंदुल क्षेत्र में प्रस्तावित औद्योगिक गतिविधियों को लेकर हाल के दिनों में स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं और आशंकाएं सामने आई थीं। दस्तावेज़ों और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल से स्पष्ट होता है कि यह किसी नए प्रोजेक्ट से नहीं जुड़ा, बल्कि मौजूदा संयंत्र के तकनीकी क्षमता विस्तार तक सीमित है।जानकारी के अनुसार, किरंदुल में संचालित बेनिफिसिएशन (बीपी) प्लांट की वर्तमान उत्पादन क्षमता 8 मिलियन टन प्रति वर्ष है, जिसे प्रस्तावित योजना के तहत 12 मिलियन टन प्रति वर्ष तक बढ़ाने की बात है। यह पूरा विस्तार मौजूदा औद्योगिक परिसर के भीतर ही किया जाना प्रस्तावित है।
अनकापल्ली प्लांट से कोई जुड़ाव नहीं
पड़ताल में यह तथ्य भी सामने आया है कि इस क्षमता विस्तार या जनसुनवाई का अनकापल्ली प्लांट से किसी भी प्रकार का कोई संबंध नहीं है। दस्तावेज़ों में वहां किसी अन्य इकाई को जोड़ने की कोई योजना दर्ज नहीं है।
न भूमि अधिग्रहण
भूमि को लेकर उठ रही आशंकाओं पर स्थिति स्पष्ट है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, इस क्षमता विस्तार के लिए किसी नए भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव नहीं है। सभी संरचनाएं वर्तमान संयंत्र परिसर के भीतर ही स्थापित की जाएंगी।
विशाखापत्तनम स्थित मौजूदा संचालन से जुड़ा विस्तार
प्रस्तावित बीपी क्षमता विस्तार परियोजना विशाखापत्तनम स्थित मौजूदा संचालन और स्थापित व्यवस्था से जुड़ी हुई है। यह विस्तार वर्तमान संचालन को बेहतर और अधिक दक्ष बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित है, न कि किसी नए औद्योगिक नेटवर्क के निर्माण के लिए।
30 दिसंबर को जनसुनवाई
पर्यावरणीय प्रक्रिया के तहत इस प्रस्ताव पर 30 दिसंबर को किरंदुल में जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत इस प्रक्रिया में प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की उपस्थिति में स्थानीय नागरिक अपनी राय, सुझाव और सवाल रख सकेंगे।
भ्रांतियों की वजह बनी अपूर्ण जानकारी
कुल मिलाकर, सामने आए तथ्यों से संकेत मिलता है कि शुरुआती भ्रम मुख्य रूप से अधूरी जानकारियों और कयासों के कारण उत्पन्न हुआ था। दस्तावेज़ों की पड़ताल के बाद स्पष्ट है कि किरंदुल में प्रस्तावित गतिविधि केवल मौजूदा बेनिफिसिएशन प्लांट के क्षमता विस्तार तक सीमित है।



