
हिंदू धर्मशास्त्रों में माघ का महीना अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना गया है। माघ के महीने का महत्व इतना ज्यादा है कि इसे “पुण्य मास” कहा जाता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों इस महीने के नाम से ही बुरी शक्तियां और नकारात्मक ऊर्जाएं कांपने लगती हैं? शायद आपको नहीं पता होगा। तो आइए जानते हैं इसके पीछे का असली कारण।
बुरी शक्तियों के भयभीत होने का कारण
शास्त्रों के अनुसार, माघ मास में सूर्य देव की किरणों में विशेष तेज होता है और वातावरण में सात्विक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है। इस महीने में किए गए स्नान, दान और जप का फल अनंत गुना होता है।
देवताओं का वास: माना जाता है कि माघ के महीने में सभी देवी-देवता स्वर्ग से उतरकर प्रयागराज (संगम) और अन्य पवित्र नदियों में निवास करते हैं। जहां देवताओं का वास होता है,वहां आसुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रभाव स्वत: ही नष्ट होने लगता है।
अंधकार पर प्रकाश की विजय: माघ का महीना कड़ाके की ठंड और अंधकार के बाद सूर्य के उत्तरायण होने की मजबूती का समय होता है। आध्यात्मिक रूप से यह अज्ञानता के अंधेरे को मिटाकर ज्ञान के प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक है।
‘मत्स्य पुराण’ और ‘पद्म पुराण’ के अनुसार, माघ स्नान करने वाले व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं। जब व्यक्ति के भीतर की नकारात्मकता और पाप खत्म होने लगते हैं, तो बुरी शक्तियां उस पर अपना प्रभाव नहीं डाल पातीं।
अमृत की बूंदें: कहा जाता है कि माघ मास में नदियों का जल अमृत के समान हो जाता है। इस ‘अमृत जल’ के स्पर्श से दरिद्रता और दुखों का नाश होता है।
तिल और दान का महत्व: इस महीने में तिल का दान और हवन किया जाता है। तिल को नकारात्मकता सोखने वाला माना गया है, इसलिए इसका उपयोग बुरी शक्तियों को दूर रखने के लिए ढाल का काम करता है।
तांत्रिक और आध्यात्मिक साधक इस महीने में विशेष साधना करते हैं। इस दौरान की गई ‘कल्पवास‘ और मंत्र साधना से व्यक्ति का ओरा (Aura) इतना शक्तिशाली हो जाता है कि कोई भी बुरी शक्ति उसके पास फटकने की हिम्मत नहीं करती।



