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एनएमडीसी के निर्पेक्ष क्रमांक-14 व 11C क्रासिंग प्लांट में नियमों की खुलेआम अनदेखी, एस.के. समानता कंपनी पर बिना पुलिस सत्यापन बाहरी मजदूरों से काम कराने का गंभीर आरोप

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एस एच अज़हर अमन पथ दंतेवाड़ा किरंदुल :  एनएमडीसी के निर्पेक्ष क्रमांक-14 एवं 11C क्रासिंग प्लांट के नए निर्माण कार्य में ठेका कंपनी एस.के. समानता द्वारा श्रम कानूनों की खुलेआम अनदेखी किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कंपनी स्थानीय आदिवासी मजदूरों को पूरी तरह दरकिनार कर ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल (कोलकाता), बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे दूसरे प्रदेशों से मजदूरों को लाकर कार्य करवा रही है।

सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि इन बाहरी मजदूरों का न तो पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया है और न ही श्रम विभाग के अनिवार्य पंजीकरण व परमिट की प्रक्रिया का पालन किया गया है। नियमों के अनुसार अंतरराज्यीय मजदूरों को जिस राज्य से लाया जाता है तथा छत्तीसगढ़ में कार्य प्रारंभ करने से पूर्व संबंधित श्रम विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य है, लेकिन ठेका कंपनी द्वारा इन नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि एनएमडीसी जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी में ठेका लेकर काम कर रही एस.के. समानता कंपनी स्थानीय आदिवासियों के हक पर सीधा हमला कर रही है। बस्तर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में बाहर से मजदूर लाकर काम कराना न केवल स्थानीय युवाओं के रोजगार के अवसर छीनने जैसा है, बल्कि यह सामाजिक और सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर चिंता का विषय है।

स्थानीय आदिवासी संगठनों का कहना है कि एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर के आदिवासियों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करने से रोकने के लिए योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर एनएमडीसी में कार्यरत ठेका कंपनियां बाहरी मजदूरों को लाकर सरकार की मंशा पर पानी फेर रही हैं। नतीजा यह है कि बस्तर के आदिवासी मजदूर अपने ही क्षेत्र में काम न मिलने के कारण मजबूरी में दूसरे प्रदेशों में पलायन कर रहे हैं।

आरोप यह भी है कि बाहरी मजदूरों की बढ़ती संख्या से स्थानीय संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है और क्षेत्र में असंतोष का माहौल बन रहा है। इसके बावजूद अब तक न तो एनएमडीसी प्रबंधन और न ही प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है, जिससे स्थानीय लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है।स्थानीय नागरिकों, मजदूर संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन, श्रम विभाग और एनएमडीसी प्रबंधन से मांग की है कि पूरे मामले की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, बिना पंजीकरण और पुलिस सत्यापन के कार्यरत मजदूरों पर रोक लगाई जाए तथा निर्माण कार्यों में स्थानीय आदिवासी मजदूरों को प्राथमिकता दी जाए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन की चेतावनी भी दी जा रही है।

आर के वर्मन एडिशनल एसपी दंतेवाड़ा– ने कहा है कि यहां एक गंभीर विषय है एस के समानता कंपनी को दूसरे प्रदेशों से लाए सारे मजदूरों का पुलिस वेरिफिकेशन करवाना अनिवार्य रूप से पड़ेगा नहीं तो जल्द से जल्द उन पर कार्रवाई की जाएगी।

नंदलाल मुड़ामी जिला पंचायत अध्यक्ष –एस के सामान्य कंपनी को स्थानीय लोगों को कार्य देना पड़ेगा नहीं तो प्रशासन द्वारा एस के समानता कंपनी उन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करवाई जाएगी।

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