हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इसे सभी अमावस्याओं में सबसे महत्वपूर्ण और फलदायी माना गया है। इस साल मौनी अमावस्या 18 जनवरी, दिन रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन मौन रहने का विशेष महत्व है, क्योंकि इससे मानसिक शक्ति मिलती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान शुभ फल मिलता है, लेकिन इस दिन के शुभ फलों को पाने के लिए कुछ खास नियमों का पालन करना पड़ता है, तो आइए जानते हैं –
मौनी अमावस्या पर क्या करें?
- इस दिन सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। अगर न हो पाए, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें।
- इस दिन का नाम ही मौनी है। इसलिए कोशिश करें कि पूरे दिन या कम से कम स्नान-पूजन तक मौन रहें। अगर चुप रहना न हो पाए, तो बुरा बोलने से बचें।
- अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित है। ऐसे में इस दिन पूर्वजों के निमित्त तर्पण व दान करें। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
- मौनी अमावस्या पर तिल, गुड़, गर्म कपड़े, अन्न और जूते-चप्पल का दान करना बहुत शुभ माना जाता है।
- इस साल यह रविवार को पड़ रही है, इसलिए इस दिन सूर्य देव को अर्घ्य जरूर दें और लाल वस्तुओं का दान भी करें।
- इस दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘ॐ नमः शिवाय’ का मन ही मन जप करते रहें।
- इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
मौनी अमावस्या पर क्या न करें?
- इस पुण्य तिथि पर सुबह देर तक नहीं सोना चाहिए।
- मौनी अमावस्या संयम का दिन है। ऐसे में घर में क्लेश, वाद-विवाद या किसी का अपमान करने से बचें।
- इस दिन मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक चीजों का सेवन भूलकर भी न करें। सात्विक भोजन ही ग्रहण करें या व्रत रखें।
- ऐसी मान्यता है कि अमावस्या की रात नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय होती हैं, इसलिए रात के समय किसी सुनसान जगह या श्मशान घाट के पास न जाएं।
करें यह उपाय
18 जनवरी 2026 को रविवार है, इसलिए इसे ‘रवि-मौनी अमावस्या’ कहा जाएगा। यह संयोग सूर्य देव की कृपा पाने के लिए अद्भुत माना जा रहा है। इस दिन तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य जरूर दें।



