Home आस्था षटतिला एकादशी पर कब करें पूजा? जानिए मुहूर्त, विधि और तिल का...

षटतिला एकादशी पर कब करें पूजा? जानिए मुहूर्त, विधि और तिल का धार्मिक महत्व…

0

षटतिला एकादशी तिला एकादशी बहुत ही पुण्यदायी व्रत माना जाता है पंचांग के अनुसार, साल 2026 में ये व्रत 14 जनवरी को पड़ रहा है. इस दिन भगवान विष्णु की विशेष उपासना की जाती है और इसे करने से मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि होती है. शास्त्रों में बताया गया है कि इस व्रत के दौरान की गई साधना, जप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है. विशेष रूप से तिल से जुड़े व्यंजन, सात्विक भोजन और प्रातः काल का शुभ मुहूर्त व्रत की पूर्णता के लिए आवश्यक माना गया है. इस दिन पूजा विधि और मुहूर्त का पालन करना धार्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है.

पूजा की तैयारी और सामग्री:- षटतिला एकादशी की पूजा की तैयारी पहले दिन से ही शुरू कर दी जाती है. पूजा में साफ-सुथरा स्थान, भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर, दीपक, कुमकुम, अक्षत, फल, दूध और घी आदि आवश्यक सामग्री रखी जाती है. व्रती को दिन भर सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और मन, वचन और क्रिया से पवित्र रहना चाहिए. पूजा स्थल पर तिल से बने व्यंजन भी रखे जा सकते हैं. शास्त्रों में बताया गया है कि पूजा की सामग्री का सही तरीके से उपयोग करने से पूजा का प्रभाव बढ़ता है और व्रती को सभी आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं.

पूजा विधि और मंत्रों का महत्व:- सबसे पहले स्नान और शुद्धि करना जरूरी है ताकि व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से साफ हो और पूजा के लिए तैयार रहे. पूजा स्थल पर दीपक जलाकर भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए. दीपक का प्रकाश अंधकार और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है. ॐ नमो नारायणाय जैसे विशेष मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है. मंत्र का उच्चारण मन और आत्मा को शांति प्रदान करता है. पूजा के दौरान तिल, फल और सात्विक भोजन अर्पित करना चाहिए. यह भगवान को प्रिय है और व्रत के नियमों का पालन होता है. इसके अलावा, गंगा जल से अभिषेक और तुलसी पूजन करना पुण्य फल देता है. इस तरह की पूजा करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मिक शक्ति और आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है.

समग्र महत्व और लाभ:- षटतिला एकादशी केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक संतुलन का प्रतीक भी है. इस दिन व्रत और पूजा के माध्यम से व्यक्ति न केवल भगवान विष्णु की उपासना करता है, बल्कि अपने कर्मों को शुद्ध कर पुण्य अर्जित करता है. तिल आधारित भोजन, सात्विक आहार और सही मुहूर्त में पूजा व्यक्ति को ऊर्जा, मानसिक स्थिरता और समृद्धि प्रदान करता है. कुल मिलाकर, षटतिला एकादशी की पूर्ण पूजा विधि और शुभ मुहूर्त का पालन करना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना गया है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here