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क्यों एक बेलपत्र से प्रसन्न हो जाते हैं भगवान शिव, जानें बिल्वाष्टकम् स्तोत्र का आध्यात्मिक महत्व

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भगवान शिव की आराधना में बेलपत्र का विशेष स्थान माना गया है। शिवभक्ति में जितना महत्व जल, दूध और भस्म का है, उतना ही महत्व बिल्वपत्र का भी बताया गया है। इसी भाव को शब्दों में पिरोता है बिल्वाष्टकम् स्तोत्र, जो शिव उपासना को सरल लेकिन अत्यंत फलदायी बनाता है। यह स्तोत्र न केवल भक्ति की भावना को मजबूत करता है, बल्कि साधक को आध्यात्मिक शांति और पुण्य फल भी प्रदान करता है। यहां हम आपने रीडर्स के लिए बिल्वाष्टकम् स्तोत्र लिरिक्स लाए हैं।

बिल्वाष्टकम् स्तोत्र का धार्मिक महत्व

बिल्वाष्टकम् स्तोत्र की रचना आदि गुरु शंकराचार्य ने भगवान शिव की उपासना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से की थी। इस स्तोत्र में बिल्वपत्र की महिमा का वर्णन करते हुए बताया गया है कि शिवलिंग पर श्रद्धा से अर्पित किया गया एक भी बेलपत्र बड़े-बड़े यज्ञों और दानों के समान पुण्य प्रदान करता है। मान्यता है कि बेलपत्र अर्पण से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह स्तोत्र शिवभक्तों के लिए सरल साधना का मार्ग दिखाता है।

बिल्वाष्टकम् स्तोत्र

प्रसिद्ध बिल्वाष्टकम् में बेल-पत्र के गुणों और उसके प्रति शिव के प्रेम का वर्णन किया गया है।

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्

त्रिजन्मपाप संहारं एक बिल्वं शिवार्पणम् ॥

अखण्ड बिल्व पात्रेण पूजिते नन्दिकेश्र्वरे
शुद्ध्यन्ति सर्वपापेभ्यो एक बिल्वं शिवार्पणम्  ॥

शालिग्राम शिलामेकां विप्राणां जातु चार्पयेत्
सोमयज्ञ महापुण्यं एक बिल्वं शिवार्पणम्  ॥

दन्तिकोटि सहस्राणि वाजपेय शतानि च
कोटि कन्या महादानं एक बिल्वं शिवार्पणम्  ॥

लक्ष्म्या स्तनुत उत्पन्नं महादेवस्य च प्रियम्
बिल्ववृक्षं प्रयच्छामि एक बिल्वं शिवार्पणम्  ॥

दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम्
अघोरपापसंहारं एक बिल्वं शिवार्पणम्  ॥

काशीक्षेत्र निवासं च कालभैरव दर्शनम्
प्रयागमाधवं दृष्ट्वा एक बिल्वं शिवार्पणम्  ॥

मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे
अग्रतः शिवरूपाय एक बिल्वं शिवार्पणम्  ॥

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