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विवेकानंद जयंती पर महाप्रबंधक सिंह ने कहा -विवेकानंद के अध्यात्मिक एवं दार्शनिक विचार आज भी प्रासंगिक

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मनेद्रगढ़ : राष्ट्रीय युवा दिवस एवं युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद की जयंती पर एसईसीएल के महा प्रबंधक ( वित्त) ए के सिंह के मुख्य आतिथ्य , में स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाई गई। पतंजलि योग समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाप्रबंधक एसईसीएल का स्वागत पतंजलि योग समिति के वरिष्ठ योग प्रशिक्षक सतीश उपाध्याय, महिला जिला प्रभारी बलबीर कौर, वनवासी विकास समिति के अध्यक्ष जगदंबा अग्रवाल आदि ने किया। कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता महिला बाल विकास परियोजना की युवा पर्यवेक्षक अंजना भगत, वरिष्ठ व्याख्याता नीलम दुबे, पतंजलि योग समिति के युवा योग साधक भैरव केसरवानी ने स्वामी विवेकानंद को युवाओं का आदर्श एवं मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि -स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी प्रासंगिक हैं।

मुख्य अतिथि के आसंदी से महाप्रबंधक एसईसीएल ने स्वामी विवेकानंद के आध्यात्मिक पक्ष को विस्तार से बताते हुए कहा कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस से उनका मिलन उनके जीवन का निर्णायक मोड़ था गुरु की शिक्षाओं ने उनके भीतर आध्यात्मिक और सामाजिक चेतना का दीप जलाया,और उन्होंने युवाओं में शक्ति साहस और आत्मविश्वास जगाने का संकल्प लिया। स्वामी विवेकानंद का जीवन संदेश आज भी प्रासंगिक है-” उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए -“उनका यह उद्देश्य वाक्य युवाओं में आत्मविश्वास ज्ञान एवं दृढ संकल्प की भावना का विकास करता है।

कार्यक्रम में उपस्थित योग साधकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा-स्वामी विवेकानंद के विचार से ही सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सनातन आध्यात्मिकता का मार्ग प्रशस्त हुआ है उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचारों से आत्मसात करके ही भारत सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है! उन्होंने जानकारी देते हुए बताया भारत सरकार ने 1984 से स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस को युवा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया वे स्वतंत्रता आंदोलन के महान क्रांतिकारियों की प्रेरणा थे। गुलामी के कालखंड में भी राष्ट्र के प्रति जो दायित्व और विश्वास प्रकट किया उसको पूर्ण करने का कार्य वर्तमान एवं भावी पीढ़ी का है. अपने सार गर्भित और जोशीले वक्तव्य में उन्होंने स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व के विभिन्न आध्यात्मिक पक्षो पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन की अल्पायु अवधि में उन्होंने जो महान कार्य किया उनको पूर्णता प्रदान करने का संकल्प लेना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

महिला बाल विकास परियोजना जिला एमसीबी की कु अंजना भगत ने कहा कि -स्वामी जी इसलिए महान है क्योंकि उन्होंने पूर्व और पश्चिम धर्म और विज्ञान अतीत और वर्तमान में सामंजस्य स्थापित किया. वे आधुनिक भारत के उन महानतम आध्यात्मिक गुरुओं और विचारको में से थे जिन्होंने न केवल भारतीय संस्कृति का विश्व में मान स्थापित किया बल्कि राष्ट्र के गौरव को भी बढ़ाया. योग एवं आध्यात्मिक से जुड़े भैरव केसरवानी ने स्वामी विवेकानंद के जन्म, उनके योगदान विश्व धर्म महासभा अंधविश्वास एवं भेदभाव के खिलाफ उठाई गए उनके विचार ,युवा शक्ति एवं उनके जीवन दर्शन के विभिन्न पक्षों को रेखांकित किया।

वरिष्ठ शिक्षिका नीलम दुबे ने कहा कि स्वामी विवेकानंद को अपनी मातृभूमि के प्रति अपार श्रद्धा और प्रेम था वह मातृभूमि के कण-कण को पवित्र और प्रेरक मानते थे उन्होंने अपने काव्य पंक्तियों से स्वामी विवेकानंद के विभिन्न आध्यात्मिक एवं दर्शन को बखूबी स्पष्ट किया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए सतीश उपाध्याय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का मानना था कि भारत के भविष्य को संवारने में युवाओं की बड़ी भूमिका है उन्होंने युवाओं से आवाहन किया था कि वह अपने ज्ञान और शक्ति का उपयोग समाज की सेवा में करें। आमंत्रित मुख्य अतिथि का आभार प्रदर्शन जगदंबा अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर योग समिति से पिंकी सलूजा, आर डी दीवान, विवेक कुमार तिवारी, रामसेवक विश्वकर्मा, अर्चना अग्रवाल,राधा सिंह, कैलाश दुबे, आदि योग साधक उपस्थित थे।

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