
पैनिक अटैक आज के समय में एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में सामने आ रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, चिंता से जुड़ी मानसिक समस्याएं दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें पैनिक अटैक जैसी स्थितियां भी शामिल हैं. यह स्थिति किसी एक उम्र या वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि टीनेजर से लेकर एडल्ट तक में देखी जा सकती है. हालांकि कुछ लोगों में इसका जोखिम अधिक पाया जाता है, लेकिन कई बार यह बिना किसी पूर्व चेतावनी के भी हो सकता है. पैनिक अटैक के दौरान व्यक्ति को अचानक असहजता महसूस होती है, जिससे रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित होने लगती है.
पैनिक अटैक क्या है, इसके कारण क्या हैं:- पैनिक अटैक एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को अचानक तेज डर, घबराहट और बेचैनी का अनुभव होता है. यह अनुभव कुछ मिनटों से लेकर आधे घंटे तक रह सकता है और व्यक्ति को कंट्रोल खोने जैसा महसूस होता है. इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें मानसिक तनाव, लंबे समय से बनी चिंता, भावनात्मक दबाव और कभी-कभी जेनेटिक कारण भी शामिल होते हैं. कुछ लोगों में यह समस्या किसी दर्दनाक अनुभव के बाद शुरू हो सकती है, जबकि कुछ में यह बिना स्पष्ट वजह के भी देखी जाती है. शरीर और दिमाग के बीच संतुलन बिगड़ने पर यह स्थिति पैदा हो सकती है. समय रहते इसके कारणों को समझना जरूरी होता है, ताकि सही इलाज और देखभाल की जा सके.
क्या हैं लक्षण:- पैनिक अटैक के लक्षण अचानक शुरू होते हैं और काफी तेज हो सकते हैं. व्यक्ति को तेज दिल की धड़कन, सांस लेने में दिक्कत, सीने में जकड़न और चक्कर आने जैसी परेशानी हो सकती है. कई बार हाथ-पैर कांपने लगते हैं, पसीना आता है और बेचैनी बढ़ जाती है. कुछ लोगों को ऐसा लगता है जैसे वे बेहोश हो जाएंगे या कंट्रोल खो देंगे. डर इतना बढ़ सकता है कि व्यक्ति को मृत्यु का भय भी महसूस होने लगता है. ये लक्षण थोड़े समय के लिए होते हैं, लेकिन इनका प्रभाव मानसिक रूप से लंबे समय तक रह सकता है.
कैसे करें बचाव?
तनाव कम करने की कोशिश करें और पर्याप्त आराम लें.
नियमित व्यायाम और योग को दिनचर्या में शामिल करें.
नींद पूरी लें और कैफीन का अधिक सेवन न करें.
घबराहट महसूस होने पर गहरी सांस लें.
समस्या बार-बार हो तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें.



