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जनवरी का आखिरी प्रदोष व्रत कब है? जानें डेट, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व…

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सनातन धर्म में हर माह में पड़ने वाला प्रदोष व्रत बड़ा विशेष माना जाता है. ये व्रत देवों के देव महादेव को समर्पित किया गया है. हर माह में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत होता है. प्रदोष व्रत के दिन लोग शिव जी की कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत रखते हैं. साथ ही शिव जी और माता पार्वती का प्रदोष काल के समय विशेष पूजन करते हैं.प्रदोष व्रत के दिन जो वार होता है, उसी के नाम से प्रदोष व्रत जाना जाता है. मान्यता है कि प्रदोष व्रत व शिव जी और माता पार्वती का पूजन करने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. जीवन में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं रहती. साथ ही शिव जी का विशेष आशीर्वाद सदा बना रहता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि जनवरी माह का अंतिम प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा? साथ ही जानते हैं इसका शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व.

कब है प्रदोष व्रत:- माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 जनवरी 2026 को सुबह 11 बजकर 09 मिनट पर शुरू होगी. वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन 31 जनवरी 2026 को सुबह 08 बजकर 25 मिनट पर हो जाएगा. चूंकि 30 जनवरी को प्रदोष काल का समय रहेगा, इसलिए प्रदोष व्रत 30 जनवरी 2026 को रखा जाएगा. इस दिन शुक्रवार रहेगा. ऐसे में ये शुक्र प्रदोष व्रत कहलाएगा.

प्रदोष व्रत पूजा शुभ मुहूर्त:- 30 जनवरी को प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल शाम को 05 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगा. प्रदोष काल का ये समय रात 08 बजकर 37 मिनट तक रहेगा. चूंकि प्रदोष व्रत पर प्रदोष काल में ही शिव जी का पूजन होता है, इसलिए इस दिन महादेव की आराधना लगभग ढाई घंटे का शुभ समय रहेगा.

प्रदोष व्रत पूजा विधि:-  प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान आदि के बाद पूजा करें. इसके बाद शाम को प्रदोष काल में विधि-विधान से शिव जी का पूजन करें. पूजा के समय पहले शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करें. इसके बाद धूप, दीप, फल, फूल, भस्म, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाएं. घी का दीपक जलाएं. प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें. भगवान शिव के मंत्रों का जप करें. अंत में भगवान शिव की आरती करके पूजा संपन्न करें. फिर प्रसाद वितरित करें.

प्रदोष व्रत का महत्व:-  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत करने से जीवन की सारी बाधाएं दूर होती हैं. सुख-समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त होता है. इतना ही नहीं मृत्यु के बाद शिव चरणों में स्थान प्राप्त होता है. शुक्र प्रदोष व्रत से सभी दुख, रोग और शोक दूर होते हैं. प्रदोष व्रत के पुण्य प्रभाव से उसके यश और कीर्ति में वृद्धि होती है.

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