
माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाने वाली जया एकादशी का हिंदू शास्त्रों में विशेष स्थान है. वर्ष 2026 में जया एकादशी 29 जनवरी, गुरुवार को श्रद्धा और विधि विधान के साथ मनाई जाएगी. पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 28 जनवरी को शाम 04 बजकर 34 मिनट से शुरू होकर 29 जनवरी को दोपहर 01 बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगी. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति पापों से मुक्त होता है और जीवन में विजय, यश और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है. पद्म पुराण, स्कंद पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण में जया एकादशी के नाम, महत्व और फल का विस्तार से वर्णन मिलता है.
शास्त्रों के अनुसार जया शब्द का अर्थ है विजय. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन के सभी पापों, बाधाओं और नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त करता है. पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, स्वर्गलोक में गंधर्वों को एक श्राप के कारण पिशाच योनि में जन्म लेना पड़ा था. जब उन्होंने जया एकादशी का विधिपूर्वक व्रत किया, तो वे उस श्राप से मुक्त हुए और पुनः अपने दिव्य स्वरूप को प्राप्त कर सके. इसी कारण इस एकादशी को जया कहा गया क्योंकि यह व्रत हर प्रकार के बंधन पर जीत दिलाने वाला माना गया है. यह नाम केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विजय का संदेश देता है.
जया एकादशी व्रत का आध्यात्मिक महत्व:- जया एकादशी केवल उपवास का दिन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और साधना का पर्व है. इस दिन भगवान विष्णु की आराधना विशेष फल देती है. शास्त्रों के अनुसार, जया एकादशी का व्रत करने से मन की अशुद्धियां दूर होती हैं और व्यक्ति में सात्विक गुणों का विकास होता है. यह व्रत आत्मसंयम, धैर्य और भक्ति की भावना को मजबूत करता है. विद्यार्थियों, साधकों और गृहस्थों सभी के लिए यह व्रत कल्याणकारी माना गया है. मान्यता है कि इस दिन किया गया जप, ध्यान और दान कई गुना फल देता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है.
जया एकादशी से जुड़ी मान्यताएं और फल:- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जया एकादशी का व्रत करने वाला व्यक्ति मृत्यु के बाद नरक यातनाओं से मुक्त रहता है और बैकुंठ को प्राप्त करता है. इस दिन अन्न दान, वस्त्र दान और जरूरतमंदों की सेवा का विशेष महत्व है. कहा जाता है कि जो भक्त श्रद्धा भाव से इस एकादशी का पालन करता है, उसके जीवन में विजय, सुख और शांति का वास होता है. जया एकादशी को भय, शोक और क्लेश से मुक्ति दिलाने वाली एकादशी माना गया है. यही कारण है कि शास्त्रों में इसे अत्यंत पुण्यदायी और मोक्ष प्रदान करने वाला व्रत बताया गया है.



