
रमजान इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना माना जाता है. यह इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना होता है, जो शाबान के बाद आता है. रमजान का नाम सुनते ही मुस्लिम समुदाय के दिलों में इबादत, सब्र, तौबा और नेकियों का जज़्बा जाग उठता है. इस पूरे महीने रोजा रखकर अल्लाह की इबादत की जाती है और गुनाहों से तौबा की जाती है. हर साल की तरह इस बार भी मुसलमानों को पाक रमजान का बेसब्री से इंतजार है. आइए जानते हैं कि रमजान 2026 कब से शुरू हो सकता है, इसका महत्व क्या है और इससे जुड़ी खास बातें.
भारत में कब से शुरू हो रहे हैं रोजे:- इस्लामिक कैलेंडर (हिजरी सन) पूरी तरह से चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करता है. खगोलीय गणनाओं के अनुसार, इस साल रमजान की तारीखों को लेकर ये अनुमान हैं. भारत में रमजान की शुरुआत 19 फरवरी 2026 (गुरुवार) से होने की उम्मीद है.
सऊदी अरब और खाड़ी देश: यहां भारत से एक दिन पहले यानी 18 फरवरी 2026 को पहला रोजा रखा जा सकता है.
क्यों खास है रमजान का महीना:-रमजान को नेकियों का मौसम कहा जाता है. मान्यता है कि सन् 610 ईस्वी में इसी महीने की एक मुकद्दस रात (लैलातुल-कद्र) को अल्लाह ने फरिश्ते जिब्रील के जरिए पैगंबर मोहम्मद साहब पर कुरान शरीफ की पहली आयतें नाजिल की थीं. कहा जाता है कि इस महीने में एक फर्ज इबादत का पुण्य 70 गुना तक बढ़ जाता है. इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, रमजान शुरू होते ही जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं. इस्लाम में रोजा रखने का मतलब केवल सुबह से शाम तक खाने-पीने का त्याग करना नहीं है. इसे रूहानी पाकगी यानी आत्मिक शुद्धता का जरिया माना गया है. रोजा रखने वाले व्यक्ति के लिए जरूरी है कि वह अपनी जुबान से झूठ न बोले और न ही किसी की बुराई करे.अपनी आंखों से कुछ भी गलत न देखे.अपने कानों से गलत बातें न सुने और अपने दिमाग में बुरे विचार न लाए.
दान और जकात का महत्व:- रमजान के महीने में जकात (दान) देने का विशेष महत्व है. हर समर्थमुसलमान अपनी सालाना कमाई का एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को देता है. इसके अलावा, ईद की नमाज से पहले फितरा देना भी अनिवार्य है, ताकि गरीब लोग भी खुशी-खुशी ईद मना सकें.
ईद-उल-फितर 2026 कब है:- रमजान का महीना 29 या 30 दिनों का होता है. इसके खत्म होने पर शव्वाल महीने की पहली तारीख को ईद-उल-फितर मनाई जाती है. अनुमान के मुताबिक, इस साल ईद 21 मार्च 2026 को मनाई जा सकती है. ईद के दिन लोग मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष नमाज अदा करते हैं, एक-दूसरे को गले लगकर मुबारकबाद देते हैं और घरों में मीठी सेवइयां व पकवान बनाए जाते हैं.



