
हिंदू धर्म में होली का त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन होली के हुड़दंग से ठीक 8 दिन पहले होलाष्टक लग जाता है. ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन 8 दिनों को शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है.अगर आप साल 2026 में शादी, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे किसी बड़े मांगलिक कार्य की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है. आइए जानते हैं होलाष्टक की सही तिथि और इस दौरान बरती जाने वाली सावधानियां.
क्या होता है होलाष्टक:- होलाष्टक शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, होली और अष्टक (यानी आठ). धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन आठ दिनों में ग्रहों का स्वभाव काफी उग्र रहता है. शास्त्रों के अनुसार, इन्हीं दिनों में भक्त प्रह्लाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप ने बेहद यातनाएं दी थीं. इसलिए, इन आठ दिनों को नकारात्मक ऊर्जा से भरा माना जाता है और इस दौरान वातावरण में शुभता की कमी रहती है.
होलाष्टक में क्या ‘न’ करें?
होलाष्टक के दौरान भूलकर भी नीचे दिए गए कार्य नहीं करने चाहिए, वरना इनके अशुभ परिणाम झेलने पड़ सकते हैं.
मांगलिक कार्य: विवाह, सगाई, मुंडन, और जनेऊ संस्कार जैसे शुभ कार्य पूरी तरह वर्जित हैं.
नया व्यवसाय: इन दिनों में नया व्यापार या दुकान शुरू करना शुभ नहीं माना जाता.
गृह प्रवेश व निर्माण: न तो नए घर की नींव रखें और न ही नए घर में प्रवेश करें.
कीमती सामान की खरीदारी: नई गाड़ी, सोना-चांदी या जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री करने से भी बचना चाहिए.
होलाष्टक में क्या ‘करें’:- भले ही शुभ कार्य वर्जित हों, लेकिन यह समय भक्ति और साधना के लिए उत्तम माना जाता है.
1. दान-पुण्य: होलाष्टक में सामर्थ्य अनुसार गरीबों को अनाज, कपड़े और धन का दान करना लाभकारी होता है.
2. मंत्रों का जाप: इस समय भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करना फलदायी रहता है. ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें.
3. आध्यात्मिक शुद्धि: घर में गंगाजल छिड़कें और शाम के समय कपूर जलाएं ताकि नकारात्मक ऊर्जा दूर रहे.



