
हिंदू कैलेंडर में फरवरी-मार्च के बीच के मास को फाल्गुन माह के रूप में जाना जाता है. फाल्गुन माह का सनातन धर्म में विशेष महत्व है. फरवरी महीने में कई त्योहार मनाए जाते हैं. इसी महीने में महाशिवरात्रि का पावन पर्व मानया है. ये पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन की याद में मनाया जाता है. इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष पूजा की जाती है. इसी माह में कई महत्वपूर्ण व्रत भी पड़ते हैं.इन्हीं व्रतों में शामिल है रोहिणी व्रत. ये व्रत हर महीने रोहिणी नक्षत्र में पड़ने वाली तिथि पर रखा जाता है. रोहिणी व्रत भगवान वासुपूज्य स्वामी को समर्पित है. इस शुभ अवसर पर जैन धर्म के लोग भक्ति भाव से भगवान वासुपूज्य की पूजा करते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि फरवरी माह में रोहिणी व्रत कब रखा जाएगा? साथ ही जानते हैं इसका शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व.
रोहिणी व्रत डेट और शुभ मुहूर्त:- फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि यानी 25 फरवरी को रोहिणी व्रत रखा जाएगा. इस शुभ तिथि पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग दोपहर 01 बजकर 38 मिनट तक रहने वाला है. भक्त अपनी सुविधा अनुसार, समय पर परमपूज्य भगवान वासु स्वामी की पूजा कर सकते हैं.
रोहिणी व्रत का महत्व:- रोहिणी व्रत के दिन जैन मंदिरों में विशेष पूजा आयोजित की जाती है. रोहिणी व्रत के दिन विवाहित महिलाएं व्रत रखती हैं. अविवाहित लड़कियां भी ये व्रत रखती हैं. जैन मान्यता है कि इस व्रत को करने से वासुपूज्य स्वामी का आशीर्वाद प्राप्त होता है. उनके आशीर्वाद से हर मनोकामना पूरी होती है. साथ ही घर में सुख और सौभाग्य बढ़ता है.
रोहिणी व्रत पूजा विधि
- रोहिणी व्रत के दिन ब्रह्म बेला में उठें. इसके बाद घर की साफ-सफाई करें.
- नित्य कर्मों से निवृत होकर गंगाजल मिले पानी से स्नान करें.
- स्नान के बाद आचमन करके व्रत का संकल्प लें.
- इसके बाद नए कपड़े पहनें और सूर्य देव को अर्घ्य दें.
- फिर भक्ति भाव से भगवान वासुपूज्य स्वामी की पूजा करें.



