नई दिल्ली: कांग्रेस की महिला सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर सरकारी दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए एक पत्र लिखा है। इसमें महिला सांसदों ने कहा कि सरकार के इशारे पर स्पीकर को ‘झूठे, बेबुनियाद और बदनाम करने वाले आरोप’ लगाने पर मजबूर किया गया।
इसमें में दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनसे खतरा महसूस हो रहा है, जिसकी वजह से वे धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देने के लिए सदन में नहीं आए।
सांसदों ने साफ किया कि यह आरोप एक दिन बाद सरकारी दबाव में पीएम के न आने का बचाव करने के लिए लगाए गए थे।
उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी ईमानदारी पर सवाल उठाना हर उस महिला पर हमला है जो पब्लिक लाइफ में सम्मान और हिम्मत के साथ अपनी जगह बनाती है।
डर की वजह से नहीं आए सदन:कांग्रेसप्रियंका गांधी वाड्रा, एस जोथिमनी, आर सुधा, गेनिबेन ठाकोर, वर्षा गायकवाड़ और ज्योत्सना महंत द्वारा साइन किए इस पत्र में लिखा गया, ‘पीएम की हाउस में गैरहाजिरी हमारी किसी धमकी की वजह से नहीं थी, यह डर की वजह से था। उनमें विपक्ष का सामना करने की हिम्मत नहीं थी।’
महिला सांसदों ने खुद पर हिंसा में शामिल होने के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अगर किसी सांसद ने धमकी दी है, तो सरकार को एफआईआर दर्ज कर उस सांसद को गिरफ्तार करना चाहिए।
उन्होंने आगे अपील की, ‘इतिहास आपको ऐसे व्यक्ति के तौर पर याद रखे जो सबसे मुश्किल हालात में भी सही के लिए खड़ा रहा… आपको ऐसे व्यक्ति के तौर पर याद न रखे जो उन लोगों के दबाव में झुक गया जो संवैधानिक मूल्यों को तोड़ने और हमारे देश के डेमोक्रेटिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचने में कोई कसर नहीं छोड़ते।’
सांसदों ने सदन में असमान व्यवहार का जिक्र करते हुए कहा कि जहां नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को चार दिनों तक बोलने नहीं दिया गया और आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया गया, वहीं एक भाजपा सांसद को पूर्व पीएम के खिलाफ भद्दे और गंदे तरीके से बोलने की अनुमति दी गई।
उन्होंने दावा किया कि स्पीकर ने गलती मानी, लेकिन कांग्रेस की दुबे के निलंबन की मांग पर सत्ताधारी पक्ष को फैसला करने दिया।



