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17 फरवरी को भारत में पहला सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण 3 मार्च को, जानें खास समय…

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सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व बहुत ज्यादा होता है. यह एक बहुत बड़ी खगोलीय घटना है जो जिंदगी में बहुत सारे बदलाव लेकर आती है. हिंदू धर्म में ग्रहण को एक अशुभ घटना के तौर पर देखा जाता है और ऐसा माना जाता है कि जब राहु और केतु (छाया ग्रह) सूर्य और चंद्रमा को निगलने का का प्रयास करते हैं तो ग्रहण लगता है. इन ग्रहण का मतलब है कि उस खास समय में सूर्य और चंद्रमा दोनों अपनी शक्ति खो देते हैं और धरती व पर्यावरण पर अपना असर डालते हैं.

ग्रहण के समय सूतक काल के कारण किसी भी तरह की पूजा-पाठ करना अशुभ माना जाता है. इस दौरान सिर्फ भगवान को अंतर्मन से याद किया जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण जीवन में भावनाओं, संवेदनाओं, ऊर्जा और ग्रहों के संदर्भ में इतने सारे बदलाव लाते हैं जो राशियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं. फाल्गुन में दो ग्रहण लग रहे हैं. पहला सूर्य ग्रहण लगेगा और दूसरा चंद्र ग्रहण लगेगा.

सूर्य ग्रहण क्या है:-  हर साल सूर्य ग्रहण आसमान देखने वालों को रोमांचित करता है. सूर्य ग्रहण तब होता है जब चांद, पृथ्वी और सूरज के बीच आ जाता है और पृथ्वी पर छाया डालता है. सूर्य ग्रहण सिर्फ अमावस्या के समय होता है, जो आमतौर पर साल में लगभग दो बार होता है. ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य को आत्मा, आत्मविश्वास, सत्ता और स्वास्थ्य का कारक माना गया है. ग्रहण के समय सूर्य देव की एनर्जी कमजोर पड़ जाती है. इसकी वजह से फैसले लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है.

चंद्र ग्रहण क्या होता है:- चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दौरान होता है, जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है. यह पूर्णता भावनात्मक प्रकटीकरण और कर्मों के शुद्धिकरण का प्रतीक है. ज्योतिष दृष्टि से चंद्र देव को मन का कारक माना गया है. ग्रहण पड़ते समय मानसिक अशांति, फैसले लेने में परेशानी और भ्रम होने की संभावना रहती है.

सूर्य ग्रहण 2026: तारीख और समय

सूर्य ग्रहण – 17 फरवरी, 2026

क्या भारत में दिखेगा – नहीं दिखेगा

चंद्र ग्रहण 2026: तारीख और समय

चंद्र ग्रहण – 3 मार्च, 2026

क्या भारत में दिखेगा- हां दिखाई देगा

समय – 06:26 PM से 06:46 PM

कब करें स्नान:- ग्रहण से पहले और बाद में आपको स्नान करना चाहिए. पवित्र नदी गंगा, नर्मदा, यमुना और शिप्रा में स्नान करना पुण्य माना गया है. इससे नेगेटिव एनर्जी दूर होती है.

ग्रहण के समय क्या दान करें:- ग्रहण खत्म होने के बाद दान-पुण्य करें. आप सूर्य, चंद्रमा, राहु और केतु से जुड़ी चीजें जैसे दूध, काले कपड़े, काली उड़द दाल, सात तरह के अनाज और सफेद कपड़े दान कर सकते हैं.

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