
क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज के मरीजों में हार्ट फेलियर और दिल की अन्य बीमारियों का एक बहुत बड़ा कारण केवल ‘शारीरिक निष्क्रियता’ है? हाल ही में हुए एक शोध ने इस बात की पुष्टि की है कि अगर डायबिटीज के मरीज फिजिकली एक्टिव नहीं रहते हैं, तो उनके लिए जानलेवा जोखिम काफी बढ़ जाते हैं।
भारत के लिए चिंताजनक आंकड़े
‘जर्नल ऑफ स्पोर्ट एंड हेल्थ साइंस’ में प्रकाशित एक नए शोध के अनुसार, भारत में डायबिटीज के मरीजों में हार्ट फेलियर के 13 प्रतिशत से भी ज्यादा मामलों के पीछे मुख्य वजह शारीरिक गतिविधि की कमी है।
विशेषज्ञों की क्या है राय?ब्राजील के रियो ग्रांडे डो सुल संघीय विश्वविद्यालय की शोधकर्ता जेन फेटर ने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि डायबिटीज होने के बाद अन्य जटिल बीमारियां होना तय है, लेकिन यह सच नहीं है।
जेन फेटर के अनुसार, “हमारे निष्कर्ष इस पुरानी धारणा को चुनौती देते हैं। यह साफ है कि अगर डायबिटीज के मरीज अपनी शारीरिक गतिविधि को उचित तरीके से बढ़ा लें, तो इन गंभीर बीमारियों के एक बड़े हिस्से को रोका जा सकता है।”
- स्ट्रोक: 10 प्रतिशत से अधिक मामले
- डायबिटिक रेटिनोपैथी : 9.7 प्रतिशत
- हार्ट फेलियर: 7.3 प्रतिशत
- कोरोनरी हार्ट डिजीज: लगभग 5 से 7 प्रतिशत
क्या है बचाव का रास्ता?इस खतरे को कम करने का उपाय बहुत ही सरल है- व्यायाम। विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह है कि हर व्यक्ति को प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट मध्यम से तीव्र शारीरिक गतिविधि जरूर करनी चाहिए। थोड़ी-सी सक्रियता डायबिटीज के मरीजों को हार्ट फेलियर और स्ट्रोक जैसे बड़े खतरों से बचा सकती है।



