
सनातन धर्म में वृषभ संक्रांति तिथि का खास महत्व है। इस शुभ अवसर पर आत्मा के कारक सूर्य देव मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में गोचर करते हैं। वृषभ संक्रांति के दिन बड़ी संख्या में साधक गंगा समेत पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं। इसके बाद भक्ति भाव से सूर्य देव की पूजा, जप-तप और दान-पुण्य करते हैं।
धार्मिक मत है कि सूर्य देव की पूजा करने से सभी प्रकार के मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। साथ ही शारीरिक कष्ट भी कम होते हैं। इस दिन दान करने से व्यक्ति को अक्षय फल मिलता है। आइए, वृषभ संक्रांति की सही तिथि एवं शुभ मुहूर्त जानते हैं-
सूर्य राशि परिवर्तन ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आत्मा के कारक सूर्य देव 15 मई को राशि परिवर्तन करेंगे। सूर्य देव 15 मई को सुबह 06 बजकर 28 मिनट पर मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में गोचर करेंगे। इस राशि में सूर्य देव 14 जून तक रहेंगे। इसके अगले दिन सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में गोचर करेंगे।
वृषभ संक्रांति शुभ मुहूर्त 15 मई को वृषभ संक्रांति मनाई जाएगी। 15 मई को पुण्य काल सुबह 05 बजकर 30 मिनट से लेकर सुबह 06 बजकर 28 मिनट तक है। वहीं, महा पुण्य काल सुबह 05 बजकर 30 मिनट से लेकर सुबह 06 बजकर 28 मिनट तक है।
वृषभ संक्रांति शुभ योग वृषभ संक्रांति पर आयुष्मान और सौभाग्य योग का संयोग बन रहा है। आयुष्मान योग दोपहर 02 बजकर 21 मिनट तक है। इसके बाद सौभाग्य योग का संयोग बनेगा। सिद्ध योग का संयोग रात भर है। इसके साथ ही भद्रावास योग का संयोग बनेगा। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 50 मिनट से लेकर 12 बजकर 45 मिनट तक है। इस समय में पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने से साधक पर सूर्य देव की कृपा बरसेगी।
पंचांग
- सूर्योदय – सुबह 05 बजकर 30 मिनट पर
- सूर्यास्त – शाम 07 बजकर 05 मिनट पर
- ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 07 मिनट से 04 बजकर 49 मिनट तक
- विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 33 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त – शाम 07 बजकर 03 मिनट से 07 बजकर 24 मिनट तक
- निशिता मुहूर्त – रात्रि 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 37 मिनट तक



