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इस बार फाल्गुन पूर्णिमा क्यों मानी जा रही है बेहद खास, एक नजर समय और संयोग पर

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वैदिक पंचांग के अनुसार, मंगलवार 03 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा है। इस शुभ अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा समेत पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं। इसके बाद विधि विधान से लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करते हैं। साथ ही श्रीसत्यनारायण कथा का पाठ करते हैं। इस साल फाल्गुन पूर्णिमा पर साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है।

ज्योतिषियों की मानें तो फाल्गुन पूर्णिमा पर कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि एवं खुशहाली आएगी। साथ ही सभी संकटों से मुक्ति मिलेगी। आइए, फाल्गुन पूर्णिमा के बारे में सबकुछ जानते हैं-

फाल्गुन पूर्णिमा शुभ मुहूर्त फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 02 मार्च को शाम 05 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी और 03 मार्च को शाम 05 बजकर 07 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि से गणना की जाती है। इस प्रकार 03 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा मनाई जाएगी।

चंद्र ग्रहण 2026 ज्योतिषियों की मानें तो फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का साया पड़ने वाला है। हालांकि, चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। इसके लिए सूतक भी लागू नहीं होगा। हालांकि चंद्र ग्रहण के दौरान शुभ काम न करने की सलाह दी जाती है। इसके लिए कोई भी शुभ काम न करें। साथ ही चंद्र ग्रहण के दौरान भगवान विष्णु का ध्यान करें। ग्रहण के बाद स्नान-ध्यान कर भगवान विष्णु की पूजा और दान अवश्य करें।

फाल्गुन पूर्णिमा शुभ योग ज्योतिषियों की मानें तो फाल्गुन पूर्णिमा के शुभ अवसर पर कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इनमें दुर्लभ सुकर्मा योग का संयोग सुबह 10 बजकर 25 मिनट तक है। इसके साथ ही शिववास योग का भी संयोग है। शिववास का संयोग शाम 05 बजकर 07 मिनट से है, जो अगले दिन यानी 04 मार्च को समाप्त होगा। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से साधक के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होगी।

मां लक्ष्मी के मंत्र1. या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।

या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥

या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।

सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥

2. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ ।

3. ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ ।।

4. ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्यः सुतान्वितः।

मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॐ ।।

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

5. ॐ ह्रीं क्ष्रौं श्रीं लक्ष्मी नृसिंहाय नमः ।

ॐ क्लीन क्ष्रौं श्रीं लक्ष्मी देव्यै नमः ।।

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