
हिंदू धर्म में होली का पावन पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन की अग्नि को बहुत ही पवित्र और ऊर्जा से भरपूर माना गया है, जिसमें हमारे जीवन की नकारात्मकता को दूर करने की शक्ति होती है। बड़े-बुजुर्ग बताते हैं कि अग्नि की परिक्रमा करना केवल एक धार्मिक रीत नहीं है, बल्कि यह ईश्वर के प्रति अपना आभार जताने और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगने का एक तरीका भी है।
अक्सर हम देखते हैं कि होलिका दहन के बाद सभी लोग अग्नि के चारों ओर घूमते हैं। इसके पीछे छिपे धार्मिक कारणों और सही विधि को समझना बहुत जरूरी है, ताकि हम इस परंपरा का पूरा लाभ उठा सकें और अपने जीवन को और भी सुखद बना सकें।
परिक्रमा की सही संख्या और उसका धार्मिक आधार
होलिका दहन के समय परिक्रमा की संख्या का बहुत महत्व होता है। आमतौर पर शास्त्रों के अनुसार अग्नि की तीन या सात बार परिक्रमा करना सबसे शुभ माना जाता है। तीन की संख्या को त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश के सम्मान में उत्तम माना जाता है, जबकि सात परिक्रमाएं हमारे जीवन के सात चक्रों की शुद्धि का संकेत देती हैं।
परिक्रमा करते समय मन में ईश्वर के प्रति धन्यवाद का भाव रखना चाहिए, जिससे हम उन सभी सुखों के लिए आभार व्यक्त कर सकें जो हमें मिले हैं। यह संख्या हमें अनुशासन और श्रद्धा की सीख देती है। सही संख्या में और शांत मन से की गई परिक्रमा मन के भीतर छिपे डर और आशंका को दूर करने में बहुत सहायक सिद्ध होती है, जिससे मानसिक बल मिलता है।
परिक्रमा के पीछे का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण
अग्नि की परिक्रमा करने के पीछे केवल श्रद्धा ही नहीं, बल्कि कुछ वैज्ञानिक कारण भी छिपे हैं। होलिका दहन के समय जब अग्नि तेज जलती है, तो उसके आसपास का तापमान बढ़ जाता है जो वातावरण में मौजूद हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करने में मदद करता है। जब हम परिक्रमा करते हैं, तो अग्नि की वह ऊर्जा हमारे शरीर को छूती है जिससे सेहत में सुधार होने की संभावना बनी रहती है।
आध्यात्मिक रूप से देखें तो, परिक्रमा करने का अर्थ है ईश्वर को अपने जीवन का केंद्र मानना। ऐसा माना जाता है कि अग्नि के चारों ओर घूमने से हमारे भीतर की नकारात्मक ऊर्जा जलकर राख हो जाती है और नई ऊर्जा का संचार होता है। इससे हमारे व्यवसाय और घर के वातावरण में सहजता और सुख-शांति आती है।
सुखद भविष्य के लिए परिक्रमा की सही विधि
- परिक्रमा शुरू करने से पहले अपने हाथ में थोड़ा जल, अक्षत और फूल लेकर भगवान का ध्यान करना चाहिए।
- शास्त्रों के अनुसार, अग्नि की परिक्रमा हमेशा घड़ी की दिशा में ही करनी चाहिए, इसे ही शुभ माना गया है।
- परिक्रमा करते समय ‘ओम होलिकायै नमः’ जैसे सरल मंत्रों का जाप करना चाहिए, इससे मन को शांति मिलती है।
- परिक्रमा पूरी होने के बाद अग्नि देव को हाथ जोड़कर प्रणाम करें और अपने परिवार की सुख-सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें।
- विधि-विधान से की गई यह परिक्रमा पितरों का आशीर्वाद दिलाती है और पिता की संपत्ति व सुख में वृद्धि का मार्ग खोलती है।
- यह छोटी सी परंपरा हमारे भविष्य के सही संचालन और बड़ी इच्छाएं पूरी करने में बहुत सहायक सिद्ध होती है।



