
राधेश्याम सोनवानी गरियाबंद :- गरियाबंद मे दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न समाज में व्याप्त जेंडर आधारित भेदभाव को मिटाने और महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से लोक आस्था सेवा संस्थान द्वारा पीएचएफ (PHF) के सहयोग से दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। जिला मुख्यालय स्थित होटल सिटी रिजेंसी में आयोजित इस कार्यक्रम में छूरा और गरियाबंद ब्लॉक के ‘संगवारी महिला मंच’ की 50 से अधिक महिला मुखियाओं और किशोरियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
परिचय और उद्देश्य
प्रशिक्षण का शुभारंभ संस्था की सचिव लता नेताम एवं अध्यक्ष हेम नारायण मानिकपुरी द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों का परिचय कराते हुए बताया कि समाज में बराबरी का हक पाने के लिए जेंडर आधारित रूढ़ियों को समझना और उन्हें तोड़ना अनिवार्य है।
खेल और वीडियो के माध्यम से जेंडर की समझ प्रशिक्षक सच्चिदानंद और विजय ने प्रोजेक्टर के माध्यम से वीडियो और रोचक गतिविधियों के जरिए ‘लिंग’ (Sex) और ‘जेंडर’ (Gender) के बीच का अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि:
लिंग (Sex): एक प्राकृतिक और जैविक संरचना है।
जेंडर (Gender): समाज द्वारा बनाई गई एक धारणा है, जिसे बदला जा सकता है।
विभिन्न खेलों और चित्रों के माध्यम से यह समझाया गया कि कैसे समाज पुरुषों और महिलाओं के बीच असमानता पैदा करता है, जबकि प्रकृति ने दोनों को समान क्षमताएं दी हैं।
पितृसत्ता और पावर पर चर्चा
प्रशिक्षण के दौरान पितृसत्ता (Patriarchy) के इतिहास और इसके समाज पर प्रभाव को रोल प्ले (नाटक) के माध्यम से जीवंत किया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि पितृसत्ता कैसे शक्ति (Power) के असंतुलन को जन्म देती है और महिलाओं के अधिकारों का दमन करती है। सत्र में यह बात प्रमुखता से उभरी कि जेंडर और पितृसत्ता हमारी सोच में बसे हैं, जिन्हें बदलने की सख्त जरूरत है।
बदलाव का संकल्प: “शुरुआत स्वयं से और अपने घर से”
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने यह संकल्प लिया कि यदि समाज में महिला और पुरुष के बीच समानता लानी है, तो इसकी शुरुआत हमें स्वयं से और अपने घर से करनी होगी।इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण शिविर में लोक आस्था की उपाध्यक्ष वंदना पाटिल समेत संस्था का समस्त स्टाफ और क्षेत्र की सक्रिय महिलाएं उपस्थित रहीं छूरा व गरियाबंद ब्लॉक की 50+ महिलाएं और किशोरियां ने प्रमुख संदेश दिया जेंडर सामाजिक है, इसे बदला जा सकता है।



