
रायगढ़, 6 मार्च 2026 : जिले की ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के माध्यम से स्वसहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, बल्कि समाज में अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं। जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत समनिया की रोशनी कुर्रे इसका प्रेरक उदाहरण हैं। शीतल महिला स्वसहायता समूह से जुड़ी रोशनी कुर्रे वर्तमान में बैंक सखी के रूप में कार्यरत हैं और गांव की महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ते हुए उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनके प्रयासों से क्षेत्र की अनेक महिलाएं संगठित होकर स्वरोजगार और आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। बैंक लिंकेज के माध्यम से प्राप्त ऋण राशि ने महिलाओं के जीवन में खुशहाली के नए द्वार खोले हैं।
रोशनी कुर्रे बताती हैं कि समूह को प्राप्त ऋण का उपयोग आजीविका गतिविधियों, छोटे व्यवसाय और खेती-किसानी में किया जा रहा है। इससे महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है और वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं के इस सशक्तिकरण का श्रेय वे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को देती हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं से आज ग्रामीण महिलाएं आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं और विकास की मुख्यधारा से सीधे जुड़ रही हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत धरमजयगढ़ महिला ब्लॉक संगठन की महिलाएं संगठित होकर आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं। बैंक सखी के माध्यम से गांवों में ही बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध होने से ऋण प्राप्ति, बचत और वित्तीय लेनदेन की प्रक्रिया सरल और सुगम हो गई है। रोशनी कुर्रे जैसी महिलाओं की यह सफलता कहानी यह संदेश देती है कि अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भरता और नेतृत्व के नए आयाम स्थापित कर सकती हैं। शासन की योजनाओं के साथ महिलाओं की मेहनत और संकल्प से ग्रामीण विकास को नई गति मिल रही है।



