
सनातन धर्म में अगहन महीने का खास महत्व है। यह महीना जगत के पालनहार भगवान कृष्ण को समर्पित है। इस महीने में रोजाना भगवान कृष्ण की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही एकादशी तिथि पर उनके निमित्त व्रत रखा जाता है।
अगहन महीने में उत्पन्ना एकादशी भी मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा की जाती है। उत्पन्ना एकादशी के दिन व्रत रखने से साधक पर लक्ष्मी नारायण जी की कृपा बरसती है। आइए, उत्पन्ना एकादशी की सही तिथि और शुभ मुहूर्त जानते हैं-
उत्पन्ना एकादशी शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, 03 दिसंबर को देर रात 11 बजकर 03 मिनट पर अगहन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि शुरू होगी। वहीं, 04 दिसंबर को देर रात 11 बजकर 44 मिनट पर मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि से गणना होती है। इसके लिए 04 दिसंबर को उत्पन्ना एकादशी मनाई जाएगी। इस तिथि पर साधक व्रत रख विधि विधान से भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं।
- सूर्योदय – सुबह 06 बजकर 59 मिनट पर
- सूर्यास्त – शाम 05 बजकर 24 मिनट पर
- ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 10 मिनट से 06 बजकर 04 मिनट तक
- विजय मुहूर्त – दोपहर 01 बजकर 55 मिनट से 02 बजकर 37 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 21 मिनट से 05 बजकर 49 मिनट तक
- निशिता मुहूर्त – रात 11 बजकर 44 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक



