
शादी हो, जन्मदिन हो या कोई शुभ अवसर हो, हम अक्सर लिफाफे में 100, 500 या 1000 रुपए के साथ 1 रुपए का सिक्का जरूर जोड़ते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि उस एक छोटे से सिक्के का क्या महत्व है? भारत में इसकी वैल्यू केवल एक सिक्के की नहीं, बल्कि शुभता, निरंतरता और रिश्तों की मजबूती का प्रतीक है।
1. नई शुरुआत का प्रतीक वैज्ञानिक दृष्टिकोण या फिर गणित के हिसाब से देखें तो 100, 500 या 1000 जैसी संख्याएं शून्य (0) पर खत्म होती हैं। शून्य का अर्थ है समाप्ति या अंत। जब हम शगुन देते हैं, तो हम नहीं चाहते कि उस रिश्ते या खुशी का अंत हो। इसमें 1 जोड़ने से संख्या 101 या 501 हो जाती है, जो यह संदेश देती है कि यह सिलसिला अभी आगे बढ़ेगा। यह ₹1 उस शून्य को तोड़कर प्रगति और निरंतरता का प्रतीक बन जाता है।
2. ‘अविभाज्य’ रिश्ता वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शगुन की राशि हमेशा विषम (Odd Number) होनी चाहिए। 100 या 500 जैसी सम संख्याओं को आसानी से दो बराबर हिस्सों में बांटा जा सकता है। लेकिन, 101, 501 या 1101 को बराबर बांटना मुश्किल होता है। यह इस बात का प्रतीक है कि देने वाले और लेने वाले के बीच का रिश्ता इतना मजबूत हो कि उसे कोई बांट न सके।
3. धातु का महत्वहिंदू धर्म में सिक्का यानी धातु का अपना महत्व है। सिक्कों को मां लक्ष्मी (Goddess Laxshami) का अंश माना जाता है। कागज के नोट तो खर्च हो जाते हैं, लेकिन सिक्का अक्सर गुल्लक या तिजोरी में रह जाता है। मान्यता ये भी है कि शगुन का यह 1 सिक्का प्राप्त करने वाले के घर में बरकत और धन की वृद्धि करता है।
लाल किताब की परंपरालाल किताब की ज्योतिषीय परंपरा में उपायों की प्रभावशीलता इसी सिद्धांत पर टिकी है। इसके अनुसार किसी भी रेमेडी को विषम संख्या (Odd Numbers) के दिनों तक करना अनिवार्य माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, अगर कोई उपाय लगातार छह हफ्ते से ज्यादा समय तक विषम दिनों की संख्या में किया जाए, तो वह पूरी तरह फलीभूत होने लगता है।



