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8वें वेतन आयोग पर आया बड़ा अपडेट, सरकार ने जारी किया ये नोटिस….

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भारत सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के बाद कर्मचारियों, पेंशनरों और संगठनों से सुझाव और प्रस्ताव मांगे हैं. सरकार ने इस संबंध में एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया है. नोटिस के अनुसार, केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को एक प्रस्ताव के जरिए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया था. आयोग का उद्देश्य केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़े ढांचे की समीक्षा करना है.आयोग ने कर्मचारी संघों, पेंशनर संगठनों, संस्थानों और इच्छुक व्यक्तियों से कहा है कि वे अपनी मांगें और सुझाव ऑनलाइन जमा करें. इसके लिए एक ऑनलाइन फॉर्म उपलब्ध कराया गया है, जिसे आयोग की वेबसाइट और MyGov पोर्टल पर भरा जा सकता है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी प्रस्ताव केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे. डाक, ई-मेल या पीडीएफ के रूप में भेजे गए सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा. सार्वजनिक नोटिस के अनुसार, सुझाव और प्रस्ताव 30 अप्रैल 2026 तक जमा किए जा सकते हैं. इसके बाद आयोग प्राप्त सुझावों का अध्ययन कर आगे की सिफारिशें तैयार करेगा.

इतनी बढ़ सकती है बेसिक सैलरी:- अगर सरकार कर्मचारी यूनियनों की मांगें मान लेती है तो केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों की सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है. प्रस्ताव के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों की बेसिक सैलरी लगभग 66% तक बढ़ सकती है. इससे सिर्फ वेतन ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि न्यूनतम सैलरी तय करने का पुराना फॉर्मूला भी बदल सकता है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था आज के परिवारों के खर्च और जिम्मेदारियों को सही तरीके से नहीं दिखाती.

अभी पुराने फॉर्मूले पर मिलती है सैलरी:- अभी सरकारी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी का हिसाब 1956 के एक फॉर्मूले पर आधारित है. यह तरीका 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन में तय किया गया था और इसे तीन सदस्यीय परिवार मॉडल कहा जाता है. इस फॉर्मूले में माना जाता है कि एक परिवार में तीन सदस्य होते हैं र्मचारी, उनका जीवनसाथी और एक बच्चा. लेकिन कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि यह मॉडल अब पुराना हो चुका है और आज के परिवारों की वास्तविक स्थिति को नहीं दिखाता. यूनियनों ने सुझाव दिया है कि परिवार की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच सदस्य मानी जाए. उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और माता-पिता समेत कई बच्चों की जिम्मेदारी के कारण पुराना फॉर्मूला अब पर्याप्त नहीं है.

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